जालना (महाराष्ट्र), सात जून (भाषा) मराठा क्रांति मोर्चा (एमकेएम) और सकल मराठा समाज के राज्य समन्वयक संजय लखेपाटिल ने राज्य सरकार पर मराठवाड़ा में मराठा समुदाय को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आरक्षण से संबंधित पुराने फैसलों और मौजूदा प्रक्रियाओं को नए उपायों के रूप में पेश किया है।
ये फैसले सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे द्वारा 30 मई को जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने के बाद लिए थे। बाद में सरकार से 12 सूत्री प्रस्ताव मिलने पर उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त कर दी थी।
शनिवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए लखेपाटिल ने आरोप लगाया कि पांच जून, 2026 को जारी सरकारी आदेश (जीआर) और हैदराबाद गजट के तहत प्रमाण पत्र जारी करने के लिए हाल ही में घोषित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में कोई नया प्रावधान नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार ने केवल मौजूदा आदेशों और प्रक्रियाओं को नए रूप में प्रस्तुत किया है और यह धारणा बनाने की कोशिश की है कि मराठा समुदाय को बड़े लाभ दिए गए हैं।
लखेपाटिल पिछले साल शिवसेना (उबाठा) के राज्य सचिव पद से इस्तीफा दे दिया था और बाद में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे। लखेपाटिल ने कहा कि हालिया घोषणाओं को ‘ऐतिहासिक’ रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि उनमें कोई नई बात नहीं है।
उन्होंने कहा कि मराठा छात्रों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के बराबर शैक्षिक रियायतें और विभिन्न कल्याणकारी लाभ देने का निर्णय तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यकाल के दौरान 24 जनवरी, 2024 को जारी एक सरकारी आदेश के माध्यम से पहले ही लिया जा चुका था।
उन्होंने आरोप लगाया कि नवीनतम सरकारी आदेश मूल रूप से पहले के निर्णय की पुनरावृत्ति हैं। लखेपाटिल ने दावा किया, ‘‘पुराने निर्णयों को केवल नए प्रारूप में टाइप करके आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया है ताकि राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।’’
भाषा संतोष प्रशांत
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