महाराष्ट्र: ‘एक दिन का सरपंच’ पहल से छात्रों को जमीनी स्तर पर शासन का अनुभव मिला

महाराष्ट्र: ‘एक दिन का सरपंच’ पहल से छात्रों को जमीनी स्तर पर शासन का अनुभव मिला

महाराष्ट्र: ‘एक दिन का सरपंच’ पहल से छात्रों को जमीनी स्तर पर शासन का अनुभव मिला
Modified Date: June 7, 2026 / 10:32 am IST
Published Date: June 7, 2026 10:32 am IST

(संदीप कोल्हटकर)

सोलापुर, सात जून (भाषा) महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक अनूठी पहल के तहत मेधावी स्कूली छात्रों को एक दिन के लिए ग्राम सरपंच की भूमिका निभाने का मौका दिया गया, जिससे उन्हें समाधान सुझाने की स्वतंत्रता और जमीनी स्तर पर शासन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो रहा है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण सोलापुर पंचायत समिति द्वारा चार जून को शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य छात्रवृत्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों के बीच लोकतांत्रिक जागरूकता, नेतृत्व कौशल और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देना है।

अधिकारियों ने बताया कि कक्षा पांचवीं और आठवीं की छात्रवृत्ति परीक्षाओं के साथ-साथ नवोदय प्रवेश परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले 13 छात्रों को उनके पैतृक गांवों में एक दिन के लिए सरपंच नियुक्त किया गया, जिनमें दक्षिण सोलापुर तहसील के मंद्रुप, वलसंग, खानापुर, आंतरोली और निंबर्गी शामिल हैं।

दक्षिण सोलापुर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) मनोज राउत ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि युवा नागरिकों में राजनीतिक जागरूकता और भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से ‘आज का विद्यार्थी, कल का जन प्रतिनिधि’ नारे के तहत यह पहल शुरू की गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने छात्रवृत्ति और नवोदय परीक्षाओं में तालुका स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों का चयन किया और उन्हें अपने गांवों में एक दिन के लिए सरपंच के रूप में कार्य करने का अवसर दिया। छात्रों का विधिवत स्वागत किया गया और उन्हें सरपंच की कुर्सी पर बैठाया गया, साथ ही उनके माता-पिता और अभिभावकों को सम्मानित किया गया।’’

राउत ने बताया कि इस अभ्यास के तहत छात्रों को स्कूलों, आंगनवाड़ियों और स्वास्थ्य केंद्रों जैसे ग्रामीण संस्थानों का दौरा कराया गया और उन्हें अपने गांवों के विकास के लिए आवश्यक उपायों और निर्णयों के सुझाव देने की पूरी छूट दी गई।

बीडीओ ने बताया कि छात्रों ने कई सुझाव दिए, जिनमें क्षतिग्रस्त स्कूल की छतों की मरम्मत, पुस्तकालयों का निर्माण, खेल के मैदानों का विकास, शौचालय सुविधाओं में सुधार और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना शामिल है।

उन्होंने बताया कि यह पहल मूल रूप से एक शैक्षणिक प्रयोग है जो बच्चों को लोकतंत्र, शासन और नेतृत्व को समझने में मदद करता है।

अधिकारी ने जोर देते हुए कहा कि छात्रों को यह समझना चाहिए कि लोक सेवा और राजनीति भी ऐसे माध्यम हैं जिनके द्वारा सार्थक परिवर्तन लाया जा सकता है।

राउत के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत नौ गांवों के 13 छात्रों का चयन किया गया, हालांकि कुछ छात्रों ने एक से अधिक परीक्षा श्रेणियों में रैंक हासिल की थी।

सोलापुर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कौशल जैन ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में इस प्रयास की सराहना की और कहा कि इस पहल को जिले की अन्य तहसीलों में भी लागू किया जाएगा।

भाषा सुरभि वैभव

वैभव


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