मुंबई, आठ सितंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने पालघर जिला के एक निजी अस्पताल में चिकित्सा कर्मियों पर शिवसेना कार्यकर्ताओं के हमले और तोड़फोड़ के मामले में कथित तौर पर कार्रवाई नहीं करने के लिए पुलिस अधीक्षक (एसपी) को अदालत में पेश होने का मंगलवार को आदेश दिया।
न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाटा की खंडपीठ ने यह बताए जाने पर आदेश दिया कि पालघर पुलिस ने अस्पताल में तोड़फोड़ और मारपीट की घटना की जांच के सिलसिले में ‘कोई गंभीर कदम नहीं उठाया’ है।
घटना पांच सितंबर को हुई थी। आरोप है कि शिवसेना के कार्यकर्ता अस्पताल में घुसकर ‘गोविंदाओं’ को जबरन अस्पताल से ले गए जो दही हांडी उत्सव में हिस्सा लेने के दौरान घायल हो गए थे।
अदालत स्वत: संज्ञान याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला जुलाई में ठाणे के एक सरकारी अस्पताल में हुई मारपीट से जुड़ा है, जिसमें शिवसेना के पार्षद रमेश म्हात्रे आरोपी हैं। इसी सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील अशोक मुंदरगी ने पालघर के अस्पताल में हुई ऐसी ही घटना की जानकारी अदालत को दी।
पालघर पुलिस ने इस घटना के संबंध में 17 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिनमें शिवसेना के जिला प्रमुख कुंदन सांखे, शहर प्रमुख राहुल घरात, विधायक राजेंद्र गावित के बेटे और उप तालुका प्रमुख रोहित गावित शामिल हैं।
पालघर में पांच घायल ‘गोविंदाओं’ को इलाज के लिए रिलीफ अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें से तीन को गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में रखा गया था।
मुंदरगी ने अदालत को बताया कि अस्पताल के चिकित्सकों ने आईसीयू में भर्ती मरीजों का सीटी स्कैन कराने की सलाह दी थी, लेकिन कई शिवसेना कार्यकर्ता अस्पताल में घुस गए, वहां तोड़फोड़ की, चिकित्सकों को धमकाया, कुछ कर्मचारियों की पिटाई की और मरीजों को जबरन अस्पताल से ले गए।
उन्होंने दावा किया कि पुलिस पर चिकित्सकों के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का दबाव था।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एस यू कामदार ने कहा कि हालांकि मामला दर्ज कर लिया गया है, लेकिन पुलिस ने जांच में ‘कोई गंभीर कदम नहीं उठाया’ है।
इसके बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष से पूछा कि इस मामले में पुलिस द्वारा अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
अतिरिक्त सरकारी वकील श्रीकांत गावंड ने कहा कि उन्हें इस मामले में पुलिस से कोई जानकारी नहीं मिली है और उन्हें जानकारी मांगने के लिए समय दिया जाए।
इसके बाद पीठ ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार को तय की और पालघर जिले के पुलिस अधीक्षक को मामले के कागजात के साथ अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
पुलिस ने सोमवार को घरात को इस मामले में गिरफ्तार किया था। उसे स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
आरोप है कि घरात भी उस समूह में शामिल था और उसने अस्पताल के एक कर्मचारी को थप्पड़ मारा था, जबकि सांखे और अन्य लोगों ने चिकित्सकों को धमकी दी थी।
भाषा जोहेब अविनाश
अविनाश