(फाइल फोटो के साथ)
जालना (महाराष्ट्र), आठ सितंबर (भाषा) मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 11वें दिन मंगलवार को तबीयत बिगड़ गई। इस दौरान उनके रक्त में शर्करा का स्तर काफी कम हो गया, जिसके बाद उन्होंने ‘आईवी फ्लूइड्स’ (नस के जरिए दिए जाने वाले तरल पदार्थ) लेने के लिए सहमति दे दी।
अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में प्रदर्शन कर रहे जरांगे ने राज्य के मंत्री उदय सामंत और विधायक प्रसाद लाड से फोन पर हुई बातचीत के बाद रात करीब ढाई बजे उपचार कराने पर सहमति जताई।
सूत्रों के मुताबिक, नेताओं ने कार्यकर्ता को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार मंगलवार से उनकी मांगों पर काम शुरू करेगी और उन्हें पूरा करने के लिए कदम उठाएगी।
जरांगे ने 29 अगस्त को अपनी भूख हड़ताल शुरू की थी। वह मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांगों में हैदराबाद और सतारा गजट के रिकॉर्ड को लागू करना तथा मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है।
कुनबी एक पारंपरिक कृषि समुदाय है, जिसे आधिकारिक तौर पर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में रखा गया है। इसके कारण इस समुदाय के लोग शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ पाने के पात्र हैं।
वाडिगोदरी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी डॉ. शुभम राठौड़ के अनुसार, जरांगे के रक्त में शर्करा का स्तर घटकर 66 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर रह गया था और उनका वजन 52 किलोग्राम से घटकर 45 किलोग्राम रह गया है। सुबह सात बजे तक उन्हें आईवी फ्लूइड्स की चार बोतलें दी जा चुकी थीं।
जरांगे ने सोमवार को पुणे, ठाणे, नासिक और मुंबई समेत प्रमुख जिलों के मराठाओं से अपील की थी कि वे 12 सितंबर को बड़ी संख्या में और पूरी ताकत के साथ अंतरवाली सराटी में एकत्र हों।
भाषा गोला सुभाष
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