महाराष्ट्र टीईटी के प्रश्नपत्र जूते के तलवे में छिपाकर बाहर निकाले गए: आरोप पत्र में खुलासा

महाराष्ट्र टीईटी के प्रश्नपत्र जूते के तलवे में छिपाकर बाहर निकाले गए: आरोप पत्र में खुलासा

महाराष्ट्र टीईटी के प्रश्नपत्र जूते के तलवे में छिपाकर बाहर निकाले गए: आरोप पत्र में खुलासा
Modified Date: September 19, 2026 / 09:39 am IST
Published Date: September 19, 2026 9:39 am IST

ठाणे, 19 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के प्रश्नपत्र आगरा स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस के दो कर्मचारियों ने अपने जूतों के तलवे में छिपाकर बाहर निकाले थे और उन्होंने महज 8,000-8,000 रुपये के लिये यह काम किया। ठाणे शहर पुलिस के करीब 3,500 पन्नों के आरोपपत्र में यह दावा किया गया है।

भिवंडी की एक स्थानीय अदालत में शुक्रवार को दाखिल आरोपपत्र में कथित मुख्य साजिशकर्ता बिजेंद्र गुप्ता समेत 18 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

गुप्ता का नाम इससे पहले ओडिशा में प्रश्नपत्र लीक के एक मामले में भी सामने आया था। मामले में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो प्रमुख सहयोगी अशोक साव और प्रकाश मिसाल फरार हैं। मामले की जांच जारी है।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आगे की जांच के आधार पर पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा।

इस गिरोह का 28 जून को होने वाली परीक्षा से एक दिन पहले उस समय पर्दाफाश हुआ था जब पुलिस उपायुक्त (जोन-द्वितीय) पवन बंसोड़ को सूचना मिली कि तीन लोग भिवंडी के एक निवासी को परीक्षा के प्रश्नपत्र बेचने की कोशिश कर रहे हैं।

पुलिस ने अपने कर्मियों को खरीदार के तौर पर पेश कर कोंगांव इलाके में जाल बिछाया जिसके बाद संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और प्रश्नपत्रों के चार सेट बरामद किए गए। इसके बाद महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (एमएससीई) के अधिकारियों ने भी पुष्टि की कि बरामद सामग्री वास्तविक प्रश्नपत्रों से मेल खाती है।

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के साथ-साथ परीक्षा में कदाचार और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से संबंधित महाराष्ट्र के कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मामले की जांच एक विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है।

आरोपपत्र के अनुसार, प्रश्नपत्र आगरा स्थित ‘महिम पत्रन प्राइवेट लिमिटेड’ नामक प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ जिसे टीईटी की परीक्षा सामग्री छापने की जिम्मेदारी दी गई थी।

आरोप है कि 15 से 17 जून के बीच प्रेस के दो कर्मचारियों और एक पूर्व कर्मचारी ने प्रश्नपत्रों को मोड़कर अपने जूतों के अंदरूनी तलवों में छिपा लिया और वे उन्हें बाहर ले गए। सुरक्षाकर्मियों ने उनके कपड़ों की तलाशी ली लेकिन जूतों की जांच नहीं की।

परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए राज्य ने टीईटी के दो प्रश्नपत्रों के चार अलग-अलग सेट तैयार किए थे, ताकि परीक्षा के दिन इनमें से किसी एक का चयन किया जा सके। हालांकि, आरोपी सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर चारों सेट बाहर निकालने में सफल रहे।

आरोपपत्र में कहा गया है कि परीक्षा सामग्री चुराने के बदले प्रेस के कर्मचारियों को महज 8,000-8,000 रुपये दिए गए और आगरा में जमीन के भूखंड देने का वादा भी किया गया था।

पुलिस ने एक कोचिंग संस्थान के पूर्व शिक्षक गुप्ता को इस अंतरराज्यीय गिरोह का कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया है। अधिकारी के मुताबिक, उसका नाम इससे पहले ओडिशा में परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक के एक अन्य मामले में भी सामने आया था।

पुलिस ने धन के लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड और तकनीकी विवरण के अलावा बिहार में गुप्ता के एक रिश्तेदार के घर से मूल प्रश्नपत्र की बरामदगी को भी अहम साक्ष्य बताया है। पुलिस के अनुसार, इससे प्रश्नपत्र पहुंचाने की पूरी कड़ी स्थापित होती है।

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन


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