सांस्कृतिक विरासत को संजोने में शिवाजी, तिलक और अंबेडकर की भूमिका अहम: उपराष्ट्रपति
सांस्कृतिक विरासत को संजोने में शिवाजी, तिलक और अंबेडकर की भूमिका अहम: उपराष्ट्रपति
पुणे, 18 सितंबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को छत्रपति शिवाजी महाराज, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और डॉ. बी. आर. आंबेडकर जैसी महान हस्तियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके योगदान ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और देश की एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘श्री गणेश कला क्रीड़ा रंगमंच’ में 38वें ‘पुणे महोत्सव’ के उद्घाटन के अवसर पर राधाकृष्णन ने कहा कि पश्चिमी महाराष्ट्र का यह ऐतिहासिक शहर साहस, सामाजिक न्याय, समानता और देशभक्ति के आदर्शों को पोषित करने वाली भूमि रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब भी हम कोई शुभ कार्य शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करते हैं। हिंदू धर्म में हम इसी रीति-रिवाज और परंपरा का पालन करते हैं।’’
उपराष्ट्रपति ने 17वीं शताब्दी के महान मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज और महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य तिलक को श्रद्धांजलि दी और इस बात पर जोर दिया कि उनके योगदान को भुलाया नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर छत्रपति शिवाजी महाराज न होते, तो इस भूमि पर हिंदू धर्म न होता। हमें उस महान बलिदान को नहीं भूलना चाहिए जिसके कारण महान हिंदू धर्म की रक्षा हुई।’
उपराष्ट्रपति ने कहा कि महान मराठा शासक ने अपने दक्षिणी अभियान (1676-77) के दौरान वेल्लोर किले और तंजावुर पैलेस पर अधिकार कर लिया था और उन्हीं के कारण वर्तमान तमिलनाडु में हिंदू धर्म की रक्षा हो सकी।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि दक्षिण भारत में छत्रपति शिवाजी महाराज के अभियान ने हिंदू परंपराओं और तमिल साहित्य को सहेजने में मदद की थी।
उन्होंने तिलक के प्रसिद्ध उद्घोष को याद किया, ‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा।’ राधाकृष्णन ने समाज सुधारक और संविधान के मुख्य शिल्पकार डॉ. आंबेडकर की भी काफी प्रशंसा की और कहा कि उनके द्वारा दिया गया संविधान भी उन कारणों में से एक है, जिसकी वजह से भारत इन सभी दशकों में एकजुट रहा है।
इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, राज्य कैबिनेट मंत्री चंद्रकांत पाटिल, आशीष शेलार और शहर के पूर्व सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत सुरेश कलमाडी की पत्नी मीरा कलमाडी भी मौजूद थीं। सुरेश कलमाडी ने ही लगभग चार दशक पहले पुणे महोत्सव की नींव रखी थी।
राधाकृष्णन ने गणेशोत्सव के साथ आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता के लिए पुणे महोत्सव के अध्यक्ष कृष्णकुमार गोयल, अध्यक्ष मीरा कलमाडी और उनकी पूरी टीम को बधाई दी।
मीरा कलमाडी और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार (दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों ने व्यक्तिगत क्षति का सामना किया, लेकिन इसके बावजूद वे आगे बढ़ती रहीं और सार्वजनिक जीवन में अपना योगदान देती रहीं।
उन्होंने उपस्थित जनसमूह से कहा, ‘(व्यक्तिगत क्षति से) वे हतोत्साहित नहीं हुई हैं… वे अब भी झंडा थामे आगे बढ़ रही हैं। यह आत्मविश्वास यहां बैठी सभी बहनों में आना चाहिए।’
गणेशोत्सव के बीच 14 सितंबर को शुरू हुआ 12 दिवसीय पुणे महोत्सव औपचारिक रूप से शुक्रवार (18 सितंबर) को शुरू हुआ।
इस वर्ष यह उत्सव 25 सितंबर को समाप्त होगा और इसे इसके संस्थापक-अध्यक्ष एवं पुणे के पूर्व सांसद सुरेश कलमाडी की स्मृति को समर्पित किया गया है, जिनका निधन इसी वर्ष जनवरी में हो गया था।
इस वार्षिक उत्सव में कला, शास्त्रीय संगीत, पारंपरिक नृत्य और नाटक का भव्य प्रदर्शन किया जाता है।
भाषा सुमित सुरेश
सुरेश

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