ममता ने वर्षों की ‘शोषणकारी राजनीति’ के कारण तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिह्न गंवाया : बावनकुले

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ममता ने वर्षों की ‘शोषणकारी राजनीति’ के कारण तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिह्न गंवाया : बावनकुले

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  • Publish Date - September 18, 2026 / 05:21 PM IST,
    Updated On - September 18, 2026 / 05:21 PM IST

नागपुर, 18 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस की आलोचना करते हुए दावा किया कि ममता बनर्जी की पार्टी ने अपना नाम और चुनाव चिह्न गंवा दिया, क्योंकि पश्चिम बंगाल के मतदाताओं ने वर्षों की ‘‘शोषणकारी राजनीति’’ के कारण उससे दूरी बना ली।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब अपनी पार्टी को नहीं बचा सकतीं, क्योंकि उनका चुनावी समर्थन आधार पूरी तरह से खत्म हो गया है, जिसके कारण तृणमूल कांग्रेस बुनियादी पंजीकरण मानदंडों को पूरा करने में असमर्थ हो गई है।

उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के पार्टी नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्वाचन आयोग के आदेश को लेकर विपक्ष के विरोध को खारिज कर दिया और ‘इंडिया’ गठबंधन को ‘‘डूबता हुआ जहाज’’ बताया।

बावनकुले ने दावा किया कि विपक्षी गठबंधन में शामिल दल लोकसभा चुनाव के दौरान साथ मिलकर शपथ लेने के बाद अलग-अलग हो गए हैं और सभी का पतन हो गया है।

भाजपा नेता ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी को संभालने में सक्षम हैं। लेकिन उनकी राजनीति शोषणकारी रही है और इसी वजह से उन्होंने वोट खोए हैं तथा वह अपनी पार्टी को बचाने में असमर्थ हैं। यही स्थिति भविष्य में शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे और ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी दलों के साथ भी होगी।’’ उन्होंने दावा किया कि 2029 तक कांग्रेस भी खुद को बचाने में सक्षम नहीं होगी।

निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी की अगुवाई वाले तृणमूल कांग्रेस के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और अरूप रॉय की अगुवाई वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम आवंटित किया। आयोग के आदेश के अनुसार, ममता गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’, जबकि अरूप रॉय गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला है।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप