(फाइल फोटो के साथ)
नागपुर, 10 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल को अपना भाई बताया और उन्हें अपने घर पर भोजन के लिए आमंत्रित किया है।
जरांगे ने इसके जवाब में कहा कि यह उनसे मिलने जाने का समय नहीं है।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में मनोज जरांगे की जारी भूख हड़ताल बृहस्पतिवार को 13वें दिन में प्रवेश कर गई।
हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि वह (अमृता) उन्हें ‘स्नेह और करुणा’ के साथ बुला रही हैं, तो वह ‘भाऊबीज’ पर उनसे मिलेंगे।
‘भाऊबीज’ भाई-बहन के बीच प्रेम और स्नेह का त्योहार है जो दिवाली के बाद आता है। इसे भाई दूज भी कहा जाता है।
जरांगे ने यह भी कहा कि वह अपनी मांगों को मनवाने के लिए मुंबई जाने की बात पर कायम हैं और 12 सितंबर को अपनी आगे की योजना का खुलासा करेंगे।
जरांगे मराठा समुदाय के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। उनकी मांगों में हैदराबाद और सतारा गजट के रिकॉर्ड को लागू करना तथा मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है।
कार्यकर्ता और उनके विरोध प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर अमृता फडणवीस ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘जरांगे पाटिल जी मेरे भाई हैं और मैं उन्हें हमारे घर भोजन के लिए आमंत्रित करती हूं।’’
जरांगे ने अंतरवाली सराटी गांव में अपने प्रदर्शनस्थल पर पत्रकारों से कहा, ‘अगर भाई विरोध-प्रदर्शन कर रहा हो, तो बहन को इस समय खाने के लिए नहीं बुलाना चाहिए। इससे भाई को परेशानी होगी। बहन को इस बारे में सोचना चाहिए और मुझे ‘भाऊबीज’ पर बुलाना चाहिए। मैं उनके लिए साड़ी लेकर जाऊंगा और यह मेरा वादा है।’
उन्होंने कहा, ‘‘यदि आप मुझे युद्ध के मैदान से बुला रहे हैं तो मुझे हार स्वीकार करनी ही होगी। अगर कोई अच्छे भाव से कुछ कह रहा है तो हर बार उसका दूसरा अर्थ निकालने की जरूरत नहीं है। लेकिन यह उनके निमंत्रण पर जाने का समय नहीं है क्योंकि भाई इस समय गरीब बच्चों के लिए लड़ रहा है। ‘भाऊबीज’ के दौरान जरूर जाऊंगा।’’
सरकार के किसी प्रतिनिधि के उनसे मिलने नहीं आने के बारे में पूछे जाने पर जरांगे ने कहा कि उन्होंने मराठा आरक्षण के लिए अपने पिछले तीन साल के आंदोलन में कभी किसी का इंतजार नहीं किया।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘‘मैं अपने दम पर आंदोलन कर रहा हूं। (सरकार का) प्रतिनिधिमंडल वैसे ही व्यवहार करेगा जैसे उन्हें दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जब एक मार्गदर्शक हो तो ठीक रहता है। अगर अलग-अलग विचारधाराओं के मार्गदर्शक एक साथ आ जाएं, तो मामला उलझ जाता है।’’
मराठा आरक्षण के लिए जरांगे के प्रदर्शन के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा था, ‘‘हम वो सब कुछ करेंगे जो संभव है। हमने कभी भी बातचीत के दरवाजे बंद नहीं किए हैं। सरकार चर्चा के जरिए समाधान निकालती है और पूरी प्रक्रिया इसी भावना के साथ आगे बढ़ रही है।’’
अमृता फडणवीस ने बुधवार को यह भी कहा था कि त्योहार समावेशी होते हैं और यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति उत्सव में शामिल होता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
उनकी यह टिप्पणी राज्य के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता नितेश राणे द्वारा विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के उस आह्वान का समर्थन करने के बाद आई है, जिसमें नवरात्र उत्सव के आयोजनों में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई थी।
भाषा प्रचेता वैभव
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