खरगे की रैली व शुद्धिकरण को लेकर नागपुर में युवा कांग्रेस का प्रदर्शन,‘मनुस्मृति’ की प्रति जलाई

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खरगे की रैली व शुद्धिकरण को लेकर नागपुर में युवा कांग्रेस का प्रदर्शन,‘मनुस्मृति’ की प्रति जलाई

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  • Publish Date - September 9, 2026 / 07:41 PM IST,
    Updated On - September 9, 2026 / 07:41 PM IST

नागपुर, नौ सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र प्रदेश युवा कांग्रेस (एमपीवाईसी) के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को नागपुर में विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर ‘मनुस्मृति’ की एक प्रति जलाई। वे यह प्रदर्शन उत्तराखंड में उस स्थान पर कथित रूप से शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित करने के विरोध में कर रहे थे, जहां पिछले महीने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक रैली को संबोधित किया था।

प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने रेशिमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर का घेराव करने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उनकी कोशिश को नाकाम कर दिया।

यह मंदिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवकों और समर्थकों के लिए एक श्रद्धेय स्थल माना जाता है।

युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता दोपहर में बड़ी संख्या में ग्रेट नाग रोड पर एकत्र हुए और वहां से डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर तक रैली निकाली। इस स्मृति मंदिर में आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार और संगठन के दूसरे सरसंघचालक (प्रमुख) एम. एस. गोलवलकर को समर्पित स्मारक स्थित हैं।

प्रदर्शन के दौरान उन्होंने आरएसएस के खिलाफ नारे लगाए। संविधान की प्रतियां हाथ में लिए कुछ कार्यकर्ताओं ने विवादित और प्राचीन कानूनी ग्रंथ ‘मनुस्मृति’ (मनु के कानून) की एक प्रति फाड़ी और उसे जला दिया।

डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर की ओर जाते समय पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने इस अत्यधिक सुरक्षा वाले भवन की ओर जाने वाली सड़क पर अवरोधक लगा दिए थे।

युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आठ अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खरगे की रैली के बाद कथित रूप से आयोजित किए गए शुद्धिकरण कार्यक्रम की निंदा की। उन्होंने कहा कि देश का संचालन संविधान के आधार पर होगा, न कि मनुस्मृति के आधार पर।

प्रदर्शन का नेतृत्व महाराष्ट्र प्रदेश युवा कांग्रेस (एमपीवाईसी) के अध्यक्ष शिवराज मोरे और सह-प्रभारी नवजोत सिंह संधू ने किया।

नागपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रफुल्ल गुडधे, रामटेक से कांग्रेस सांसद श्यामकुमार बर्वे और स्थानीय नेताओं ने भी इस आंदोलन में हिस्सा लिया।

भाषा तान्या संतोष

संतोष