आंबेडकर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में व्यक्ति को छह महीने के सश्रम कारावास की सजा

आंबेडकर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में व्यक्ति को छह महीने के सश्रम कारावास की सजा

आंबेडकर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में व्यक्ति को छह महीने के सश्रम कारावास की सजा
Modified Date: August 19, 2026 / 07:43 pm IST
Published Date: August 19, 2026 7:43 pm IST

मुंबई, 19 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र की एक विशेष अदालत ने 32 वर्षीय एक व्यक्ति को अक्टूबर 2016 में बहस के दौरान डॉ. बी. आर. आंबेडकर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने और एक अधिवक्ता के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने के मामले में छह महीने के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

अदालत ने बचाव पक्ष की इस दलील को खारिज कर दिया कि अपराध साबित करने के लिए कोई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी या सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं था। अदालत ने कहा कि घटना सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली जगह पर रिहायशी इमारतों और पान की दुकान के पास सड़क पर हुई थी।

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामलों की विशेष अदालत के न्यायाधीश वाई. पी. मनाठकर ने मंगलवार को आरोपी शकील को अधिनियम की धाराओं तीन (1)(आर) और धारा तीन (1)(वी) के तहत दोषी ठहराया।

अदालत ने आरोपी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

हालांकि, पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने के कारण अदालत ने शकील को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के आरोपों से बरी कर दिया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 13 अक्टूबर 2016 की रात उपनगरीय चेंबूर के वाशीनाका स्थित आरएनए कॉलोनी के निकट हुई थी।

इसके अनुसार, शिकायतकर्ता अधिवक्ता विनोद सतपुते ने अपनी कार खड़ी की थी, तभी आरोपी ने उन्हें रोक लिया, जातिसूचक टिप्पणियां कीं और उसके खिलाफ पहले दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत वापस लेने की मांग की।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि सतपुते के इनकार करने पर शकील ने उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और डॉ. आंबेडकर के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां कीं।

घटना के बाद सतपुते ने आरसीएफ पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

भाषा तान्या देवेंद्र

देवेंद्र


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