मराठा आरक्षण: जरांगे तेज धूप में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे, सरकार पर दबाव बढ़ा

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मराठा आरक्षण: जरांगे तेज धूप में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे, सरकार पर दबाव बढ़ा

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  • Publish Date - May 30, 2026 / 09:00 PM IST,
    Updated On - May 30, 2026 / 09:00 PM IST

जालना, 30 मई(भाषा) मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शनिवार को जालना जिले में भीषण गर्मी में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया।

पिछले तीन वर्षों में यह उनका नौवां अनशन है।

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए 12 सूत्री प्रस्ताव सौंपा है। जरांगे ने कहा कि उनकी टीम के कानूनी विशेषज्ञ आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लेने से पहले सरकार के प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन करेंगे।

आरक्षण कार्यकर्ता ने मुंबई से लगभग 400 किलोमीटर दूर अंतरवाली सारती गांव में भीषण गर्मी के बावजूद बिना किसी छांव या आश्रय के खुले में अनशन शुरू किया।

जैसे ही विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ, मराठा आरक्षण कैबिनेट उप-समिति के प्रमुख राज्य मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल तुरंत मौके पर पहुंचे और जरांगे से बातचीत कर उन्हें आंदोलन समाप्त करने के लिए राजी करने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को सकारात्मक रूप से हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जरांगे ने मराठा समुदाय के सदस्यों को ओबीसी कोटा का लाभ उठाने के लिए कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने, हैदराबाद व सतारा राजपत्र के अभिलेखों को लागू करने और आरक्षण आंदोलन में भाग लेने वाले मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की अपनी मांग दोहराई।

विखे पाटिल ने जरांगे से छाया में बैठने का अनुरोध करते हुए उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार इस मुद्दे को सुलझाने के प्रयास कर रही है।

मंत्री ने बाद में जरांगे को सरकार का 12 सूत्रीय मसौदा प्रस्ताव सौंपा और उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की।

विखे पाटिल ने कहा, “सरकार मराठा समुदाय की मांगों के प्रति पूरी तरह सकारात्मक है। इसलिए मैं मनोज जरांगे से अनुरोध करता हूं कि वह अनशन जारी रखने की जिद छोड़ दें। अगर वह आंदोलन जारी रखना चाहते हैं, तो कम से कम चिलचिलाती धूप में बैठने के बजाय छाया में बैठें और अपने स्वास्थ्य को खतरे में न डालें।”

मंत्री ने मसौदा सौंपने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए समुदाय की चिंताओं को दूर करने में प्रशासनिक कमियों को स्वीकार किया।

उन्होंने कहा, “सरकार मराठा समुदाय द्वारा उठाई गई मांगों पर लगातार काम कर रही है। हम इस बात से इनकार नहीं करते कि कमियां और कठिनाइयां आई हैं। विशेष रूप से, क्षेत्रीय और स्थानीय प्रशासनिक स्तरों पर देरी व बाधाओं ने मराठों में गहरा असंतोष उत्पन्न किया है। हालांकि, सरकार इस मुद्दे को प्रतिष्ठा का विषय नहीं मानती और इसे सकारात्मक रूप से हल करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।”

विखे पाटिल ने सतारा राजपत्र के विवादास्पद मुद्दे में शामिल कानूनी जटिलताओं का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “हम जरांगे और उनके विशेषज्ञों से अनुरोध करते हैं कि वे 12 सूत्री मसौदा का गहन अध्ययन करें और तब तक अनशन स्थगित कर दें।”

जरांगे ने सरकार के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आजकल तो ऐसा लगता है मानो हर गली में आरक्षण विशेषज्ञ मौजूद हैं। जब भी कोई सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी होता है, ये विशेषज्ञ पहले तो उसे सही बताते हैं लेकिन कुछ दिनों बाद उसमें सैकड़ों खामियां निकालने लगते हैं, जिससे समुदाय में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।’’

उन्होंने कहा कि सरकार के प्रस्ताव पर तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। जरांगे ने कहा, “हमारी कोर कमेटी और कानूनी विशेषज्ञ पहले सरकार के 12 सूत्री मसौदे का विस्तृत अध्ययन करेंगे। उसके बाद ही हम आंदोलन के संबंध में अपना अंतिम रुख घोषित करेंगे। ”

भाषा जितेंद्र माधव

माधव