Marathi Language Dispute News: भाषावाद पर फिर होगा बवाल!.. मंत्री ने कहा, ‘राज्य में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य होगी’.. डेडलाइन भी तय

महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य, 1 मई डेडलाइन, मंत्री के फैसले पर विवाद तेज

Marathi Language Dispute News: भाषावाद पर फिर होगा बवाल!.. मंत्री ने कहा, ‘राज्य में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य होगी’.. डेडलाइन भी तय

Marathi Language Dispute News || Image- IANS File

Modified Date: April 11, 2026 / 08:04 am IST
Published Date: April 11, 2026 8:04 am IST

मुंबई: महाराष्ट्र में एक बार फिर से भाषावाद के विवाद को हवा दी जा रही है। राज्य सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने ऐलान किया है कि, राज्य में रिक्शा चलाने के लिए मराठी भाषा अनिवार्य होगी। (Marathi Language Dispute News) हालांकि मंत्री के इस बयान की आलोचना शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के अल्पसंख्यक नेता अबू आसिम आजमी ने मंत्री के बयान पर उन्हें घेरा है।

सपा नेता ने किया विरोध

अबू आसिम आजमी ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि, “हर राज्य की अपनी भाषा होती है। अगर इसे अनिवार्य करना है, तो स्कूलों में सबसे पहले मराठी पढ़ाई जानी चाहिए , खासकर उन लोगों के लिए जो इसमें निपुण नहीं हैं। हर देश की अपनी भाषा होती है, तो फिर राष्ट्रीय भाषा हिंदी कहां बोली जाएगी?” उन्होंने आगे कहा, “अगर आप चाहते हैं कि लोग मराठी सीखें, तो किताबें और कक्षाएं उपलब्ध कराएं, उन पर दबाव न डालें।” सपा नेता ने बेरोजगारी के मुद्दे पर कहा कि “बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है। दूसरे राज्यों से लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए मुंबई आते हैं। उन्हें कमाने का अधिकार है। उन्हें राज्य की भाषा सिखाएं और फिर लाइसेंस और परमिट प्रदान करें।”

1 मई के बाद कार्रवाई की चेतावनी

गौरतलब है कि, राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए कहा कि यह फैसला राज्य के सभी रिक्शा चालकों पर लागू होता है, न कि केवल मीरा भायंदर पर, जैसा कि पहले बताया गया था। परिवहन मंत्री सरनाइक ने चेतावनी दी है कि 1 मई तक जांच के बाद नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। (Marathi Language Dispute News) नई पहल के तहत ड्राइवरों को मराठी पढ़ना, लिखना और बोलना आना अनिवार्य होगा। इस प्रायोगिक परियोजना का उद्देश्य परिवहन लाइसेंस जारी करने में अनियमितताओं को दूर करना है और इसे धीरे-धीरे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

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