निकाय चुनाव: भाजपा उम्मीदवार को राहत, उच्च न्यायालय ने नवी मुंबई वार्ड में चुनाव पर अंतरिम रोक लगाई

निकाय चुनाव: भाजपा उम्मीदवार को राहत, उच्च न्यायालय ने नवी मुंबई वार्ड में चुनाव पर अंतरिम रोक लगाई

निकाय चुनाव: भाजपा उम्मीदवार को राहत, उच्च न्यायालय ने नवी मुंबई वार्ड में चुनाव पर अंतरिम रोक लगाई
Modified Date: January 8, 2026 / 09:20 pm IST
Published Date: January 8, 2026 9:20 pm IST

मुंबई, आठ जनवरी (भाषा) बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को नवी मुंबई नगर निगम के वार्ड 17ए (वाशी) में आगामी चुनाव पर अंतरिम रोक लगा दी और एक निर्वाचन अधिकारी द्वारा भाजपा उम्मीदवार के नामांकन को खारिज करने के आदेश पर भी रोक लगा दी।

भाजपा नेता नीलेश भोजने का नामांकन फॉर्म निर्वाचन अधिकारी ने महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की धारा 10(1डी) के तहत इस आधार पर खारिज कर दिया कि उनकी संपत्ति पर अनधिकृत निर्माण हुआ था।

मुख्य न्यायाधीश श्री चन्द्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने भोजने के नामांकन प्रपत्र को खारिज करके ‘प्रथम दृष्टया शक्तियों का अवैध और मनमाना प्रयोग प्रदर्शित किया है’।

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अपने अंतरिम आदेश में, अदालत ने नवी मुंबई नगर निकाय के वार्ड 17ए में 15 जनवरी को होने वाले चुनाव के लिए भोजने के नामांकन प्रपत्र को खारिज करने के निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर रोक लगा दी।

उच्च न्यायालय ने कहा, “राज्य चुनाव आयोग, आयुक्त, नवी मुंबई नगर निगम, मुख्य निर्वाचन अधिकारी और चुनाव निर्वाचन अधिकारी, नवी मुंबई नगर निगम के वार्ड नंबर 17ए के लिए पार्षद की सीट पर चुनाव के संबंध में आगे नहीं बढ़ेंगे।”

अदालत इस मामले की आगे की सुनवाई शुक्रवार को करेगी।

भोजने ने उनके नामांकन को अवैध ठहराने वाले निर्वाचन अधिकारी के 31 दिसंबर, 2025 के आदेश को चुनौती दी थी।

महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की धारा 10(1डी) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या उसके परिवार के किसी आश्रित सदस्य ने किसी अवैध या अनधिकृत संरचना का निर्माण किया है, तो उसे पार्षद बनने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

भोजने ने अपनी याचिका में कहा कि यह धारा सिर्फ मौजूदा पार्षद पर लागू होती है, उम्मीदवार पर नहीं।

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालना या रोकना एक बात है, जबकि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों या वार्डों में हस्तक्षेप करना दूसरी बात है।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत दिए जाने की आवश्यकता है क्योंकि धारा 10(1डी) उसके मामले में लागू नहीं है।

भाषा तान्या सुरेश

सुरेश


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