लातूर, नौ जून (भाषा) महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक न्यायाधिकरण ने 89 वर्षीय महिला के संपत्ति अधिकारों को बहाल करते हुए उनके पोते और परपोते को उपहार बैनामा के माध्यम से संपत्ति हस्तांतरण को रद्द कर दिया है क्योंकि वे उनकी देखभाल और भरण-पोषण करने में विफल रहे थे।
वरिष्ठ नागरिक न्यायाधिकरण की पीठासीन अधिकारी रोहिणी नरहे-विरोले ने अपने आदेश में कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और भरण-पोषण करना केवल एक नैतिक जिम्मेदारी नहीं है बल्कि संपत्ति हस्तांतरण के समय कानूनी रूप से लागू होने योग्य एक शर्त है।
मामले में 18 मार्च को जारी आदेश की एक प्रति सोमवार को उपलब्ध कराई गई।
यह मामला लातूर जिले के करसा गांव में स्थित तीन हेक्टेयर कृषि भूमि से संबंधित है।
मामले के रिकॉर्ड के अनुसार हौसाबाई लाहाडे ने पंजीकृत उपहार बैनामा के माध्यम से अपनी संपत्ति अपने पोते और परपोते के नाम कर दी थी। बताया जाता है कि यह हस्तांतरण इस समझ के साथ किया गया था कि लाभार्थी उनकी देखभाल, भरण-पोषण और सहायता करेंगे।
आरोप है कि लाभार्थियों ने बाद में अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं किया जिसके कारण बुजुर्ग महिला ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत कानूनी हस्तक्षेप का अनुरोध किया।
उपहार बैनामा, दस्तावेजी साक्ष्य और दोनों पक्षों की दलीलों की जांच करने के बाद न्यायाधिकरण ने पाया कि वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा देखभाल का दायित्व केवल एक नैतिक जिम्मेदारी नहीं है बल्कि संपत्ति के इस तरह के आश्वासनों पर हस्तांतरित किए जाते समय यह कानूनी रूप से लागू करने योग्य एक शर्त है।
हस्तांतरण से जुड़ी शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर न्यायाधिकरण ने पंजीकृत उपहार बैनामा को रद्द करने का आदेश दिया। इसने बैनामा के आधार पर किए गए राजस्व परिवर्तन प्रविष्टियों को तत्काल रद्द करने का भी निर्देश दिया ताकि मूल स्वामित्व अधिकारों को बहाल किया जा सके।
भाषा सुरभि नरेश
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