मुंबई, पांच फरवरी (भाषा) प्रख्यात अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने दावा किया है कि मुंबई विश्वविद्यालय ने एक कार्यक्रम का निमंत्रण बिना किसी स्पष्टीकरण या माफी के अंतिम समय में वापस ले लिया। उन्होंने इसे अपमानजनक और निराशाजनक अनुभव बताया क्योंकि वह छात्रों के साथ बातचीत करने के लिए उत्सुक थे।
नसीरुद्दीन शाह का लेख बृहस्पतिवार को इंडियन एक्सप्रेस अखबार में प्रकाशित हुआ। अभिनेता ने कहा कि वह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग द्वारा एक फरवरी को आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के इच्छुक थे। लेकिन 31 जनवरी की रात को सूचित किया गया कि उन्हें आने की आवश्यकता नहीं है।
नसीरुद्दीन शाह ने लिखा, ‘‘मुंबई विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग ने एक फरवरी को जश्न-ए-उर्दू आयोजित किया था और इसके लिए उन्हें दिया गया निमंत्रण अंतिम समय में वापस ले लिया गया। यह एक ऐसा कार्यक्रम था जिसका मैं बेसब्री से इंतजार कर रहा था क्योंकि यह छात्रों से संवाद के लिए मंच था।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘विश्वविद्यालय ने मुझे (31 जनवरी की रात को) सूचित किया कि मुझे शिरकत करने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए माफी मांगने की तो बात तो छोड़ दें कारण भी नहीं बताया गया। जाहिर तौर पर क्या यह अपमानजनक नहीं था।’’
अभिनेता ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय ने बाद में कार्यक्रम में मौजूद लोगों को सूचित किया कि उन्होंने (अभिनेता ने) उसमें हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था।
नसीरुद्दीन शाह ने लिखा, ‘‘यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि उनमें सच कहने का साहस नहीं था – कि मैं ‘खुले तौर पर देश के खिलाफ बयान देता हूं’,(यदि ये बयान गुप्त होते तो शायद उन्हें कोई आपत्ति न होती। कम से कम, एक वरिष्ठ विश्वविद्यालय अधिकारी ने कथित तौर पर यही कहा था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर वह सिर्फ दिखावा नहीं कर रहे हैं और वास्तव में उस बयान पर विश्वास करते हैं, तो मैं संबंधित सज्जन को चुनौती देता हूं कि वे मेरा एक भी ऐसा बयान पेश करें जिसमें मैंने अपने देश की निंदा की हो।’’
‘निशांत’, ‘आक्रोश’, ‘जाने भी दो यारो’, ‘मासूम’ और ‘स्पर्श’ जैसी चर्चित फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि वह सत्तारूढ़ दल द्वारा किए जाने वाले कई कार्यों की अक्सर आलोचना करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अक्सर अपने देश में सामाजिक जिम्मेदारी की कमी और दूसरों के प्रति विचार पर अफसोस जताया है।’’
अभिनेता ने कहा कि वह कई अन्य मुद्दों पर भी मुखर रहे हैं – ऐसी चीजें जो ‘‘मेरे जैसे लोगों को उस दिशा के बारे में चिंतित करती हैं जिसमें हम आगे बढ़ते हुए प्रतीत होते हैं’’।
उन्होंने कहा, ‘‘…जहां छात्र कार्यकर्ताओं को बिना मुकदमे के वर्षों तक हिरासत में रखा जाता है, लेकिन दोषी बलात्कारियों/हत्यारों को अक्सर जमानत मिल जाती है, जहां गौ रक्षकों को अंगभंग करने और हत्या करने की खुली छूट है, जहां इतिहास को फिर से लिखा जा रहा है और पाठ्यपुस्तकों की सामग्री को संशोधित किया जा रहा है, जहां विज्ञान के साथ भी छेड़छाड़ की जा रही है, जहां एक मुख्यमंत्री, खुद ‘मियां’ समुदाय को परेशान करने की बात करते हैं।’’
नसीरु₨द्दीन शाह ने सवाल किया, ‘‘यह नफरत कब तक कायम रह सकती है?’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह वह देश नहीं है जिसमें मैं पला-बढ़ा और जिसे प्यार करना सिखाया गया।’’
अभिनेता ने कहा, ‘‘विचारों पर बंदिश और दोहरी भाषा को पूरी ताकत से लागू किया जा रहा है, साथ ही निगरानी भी बढ़ा दी गई है। दो मिनट की नफरत अब 24 घंटे की नफरत में बदल गई है।’’
उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या इस स्थिति की तुलना जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास ‘1984’ से करना अतिशयोक्ति होगी, जिसमें ‘महान नेता’ की प्रशंसा न करना राजद्रोह माना जाता है?’’
भाषा
धीरज पवनेश
पवनेश