सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में हिस्सा लेने मात्र से किसी व्यक्ति को जिला बदर नहीं किया जा सकता: अदालत

सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में हिस्सा लेने मात्र से किसी व्यक्ति को जिला बदर नहीं किया जा सकता: अदालत

सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में हिस्सा लेने मात्र से किसी व्यक्ति को जिला बदर नहीं किया जा सकता: अदालत
Modified Date: July 3, 2026 / 11:03 am IST
Published Date: July 3, 2026 11:03 am IST

मुंबई, तीन जुलाई (भाषा) बम्बई उच्च न्यायालय ने कहा कि सरकार के खिलाफ आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होने मात्र के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ जिला बदर का आदेश पारित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने एक स्थानीय नेता के खिलाफ जारी एक वर्ष के जिला बदर आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।

न्यायमूर्ति माधव जामदार की एकल पीठ ने बृहस्पतिवार को पारित आदेश में कहा कि केवल भारत सरकार के कुछ फैसलों का विरोध करने के कारण सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी को जिला बदर करना उनके मौलिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार को प्रभावित करता है।

अदालत ने चौधरी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की समीक्षा करने के बाद कहा कि उन्होंने (चौधरी ने) भाजपा सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाए थे, जिनके आधार पर जिला बदर का आदेश जारी किया गया था।

अदालत ने सवाल किया, ‘‘ क्या केवल नारे लगाने के लिए जिला बदर का आदेश जारी किया जा सकता है? क्या नागरिक ऐसे नारे नहीं लगा सकते? सरकार की कार्रवाइयों और फैसलों के खिलाफ नागरिक विरोध-प्रदर्शन क्यों नहीं कर सकते?’’

अदालत ने यह आदेश सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया से जुड़े चौधरी द्वारा दायर याचिका पर जारी किया।

चौधरी ने याचिका में मुंबई पुलिस की ओर से उनके खिलाफ की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी।

याचिका के अनुसार, चौधरी और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा सरकार के कुछ फैसलों के खिलाफ कई विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन किए जाने के बाद उनके खिलाफ जिला बदर का आदेश जारी किया गया था।

पुलिस का दावा था कि ये विरोध-प्रदर्शन संबंधित अधिकारियों से आवश्यक अनुमति लिए बिना आयोजित किए गए थे।

अदालत ने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी मौजूद नहीं है, जिससे यह साबित हो कि आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों से कोई नुकसान हुआ था इसलिए केवल इन्हीं के आधार पर महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के प्रावधानों के तहत जिला बदर का आदेश जारी नहीं किया जा सकता।

भाषा जितेंद्र शोभना

शोभना


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