एसआईटी रिपोर्ट पर एक सदस्यीय समिति न्यायालय, न्यायिक प्रक्रिया का ‘अपमान’ : वाईएसआर कांग्रेस पार्टी

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एसआईटी रिपोर्ट पर एक सदस्यीय समिति न्यायालय, न्यायिक प्रक्रिया का ‘अपमान’ : वाईएसआर कांग्रेस पार्टी

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  • Publish Date - February 21, 2026 / 02:54 PM IST,
    Updated On - February 21, 2026 / 02:54 PM IST

तिरुपति, 21 फरवरी (भाषा) वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीटीडी) के पूर्व अध्यक्ष बी. करुणाकर रेड्डी ने कहा कि तिरुपति में लड्डुओं में मिलावट के मामले की जांच कर रही एसआईटी की एक रिपोर्ट की जांच के लिए आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा एक सदस्यीय समिति की नियुक्ति करना उच्चतम न्यायालय और न्यायिक प्रक्रिया का ‘‘अपमान’’ है।

शुक्रवार को एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार ने सीबीआई के नेतृत्व वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) की सारांश रिपोर्ट की जांच करने और दोषी लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की सिफारिश करने के लिए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार के नेतृत्व में एक सदस्यीय समिति गठित की थी।

उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी द्वारा जांच पूरी करने और आरोप पत्र दाखिल करने के बाद इस समिति का गठन किया गया था।

करुणाकर रेड्डी ने शुक्रवार देर रात को वाईएसआरसीपी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘एसआईटी द्वारा आरोपपत्र दाखिल करने के बाद एक सदस्यीय समिति की नियुक्ति करना उच्चतम न्यायालय और न्यायिक प्रक्रिया का अपमान करने के अलावा और कुछ नहीं है।’’

श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर का प्रबंधन करने वाले तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के दो बार अध्यक्ष रह चुके रेड्डी ने कहा कि नायडू ने तिरुमला लड्डू के घी में मिलावट के विवाद की एसआईटी जांच में उनके बयान का समर्थन न मिलने के बाद एक सदस्यीय समिति नियुक्त करके एक नया राजनीतिक नाटक शुरू किया है।

रेड्डी ने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत लगभग एक साल तक आठ राज्यों में की गई सीबीआई-एसआईटी जांच में ‘‘वाईएसआरसीपी नेताओं को दोषी नहीं ठहराया गया और प्रभावी रूप से उन्हें क्लीन चिट दे दी गई।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तेदेपा सुप्रीमो अब विपक्षी पार्टी के सदस्यों को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए एक नयी समिति के माध्यम से इस मुद्दे को फिर से उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

भाषा गोला प्रशांत

प्रशांत