महिला आरक्षण विधेयक पारित होने से लोकतंत्र और संविधान की हार सुनिश्चित होती: आदित्य ठाकरे

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महिला आरक्षण विधेयक पारित होने से लोकतंत्र और संविधान की हार सुनिश्चित होती: आदित्य ठाकरे

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  • Publish Date - April 18, 2026 / 11:08 AM IST,
    Updated On - April 18, 2026 / 11:08 AM IST

मुंबई, 18 अप्रैल (भाषा) शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे ने शनिवार को कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 2029 से आरक्षण लागू करने और लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पारित होने से ‘‘लोकतंत्र की पूर्ण पराजय’’ सुनिश्चित हो जाती।

ठाकरे ने आरोप लगाया कि परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा यह कानून राज्यों की आवाज को कम करने के लिए बनाया गया एक राजनीतिक उपकरण था।

ठाकरे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि यह विधेयक सत्तारूढ़ शासन की राजनीतिक मंशा के तहत संविधान में संशोधन करता, ताकि सीटों की संख्या बढ़ाई जा सके, कई राज्यों की आवाज को कम किया जा सके और निर्वाचन क्षेत्रों का इस तरह परिसीमन किया जा सके कि अनुचित तरीके से जीत सुनिश्चित हो।

उन्होंने लिखा, ‘वह संशोधन जो भारत में लोकतंत्र और संविधान की पूर्ण हार सुनिश्चित करता, उसे विपक्षी सांसदों की एकजुटता ने खारिज कर दिया।’

पूर्व मंत्री ने कहा कि इस विधेयक को ‘अनुचित जीत सुनिश्चित करने के लिए परिसीमन विधेयक’ कहा जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मौजूदा सीटों की संख्या में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की वास्तविक जरूरत है।

उन्होंने लिखा, ‘‘अब यह सरकार पर निर्भर है कि यदि उसकी वास्तव में यही मंशा है तो वह 2029 के चुनावों के लिए लोकसभा की 543 सीटों में इसे लागू करना सुनिश्चित करे।’’

लोकसभा और विधानसभाओं में 2029 से महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को निचले सदन में पारित नहीं हो सका।

भाषा तान्या सिम्मी

सिम्मी