बीएमसी चुनाव के लिए ‘बड़े पैमाने’ पर नामांकन खारिज किये जाने के खिलाफ जनहित याचिका खारिज
बीएमसी चुनाव के लिए ‘बड़े पैमाने’ पर नामांकन खारिज किये जाने के खिलाफ जनहित याचिका खारिज
मुंबई, नौ जनवरी (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि 15 जनवरी को होने वाले बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों के लिए बड़ी संख्या में नामांकन पत्र ‘मामूली और अति-तकनीकी’’ आधार पर खारिज कर दिए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका को नगर आयुक्त सह जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईसी) की ओर से पेश अधिवक्ता की दलील सुनने के बाद खारिज कर दिया। अधिवक्ता जोएल कार्लोस ने दलील दी कि याचिकाकर्ता उम्मीदवार नहीं था और इस मामले में याचिका दाखिल करने का उसे कोई अधिकार नहीं है।
याचिकाकर्ता ने मुख्य रूप से कई ‘अनापत्ति प्रमाण पत्रों’ (एनओसी) की अनिवार्यता को चुनौती दी, जो कथित तौर पर राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) द्वारा जारी आधिकारिक शर्तों का हिस्सा नहीं थे।
सामाजिक कार्यकर्ता मोजम अली मीर की ओर से दाखिल जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि बीएमसी के सभी 227 वार्ड के चुनाव अधिकारियों (आरओ) ने सत्तारूढ़ दल को लाभ पहुंचाने के लिए हजारों संभावित उम्मीदवारों को ‘अति तकनीकी’ और ‘गैर-कानूनी’ आधारों पर अयोग्य घोषित कर दिया है।
याचिका के अनुसार, उम्मीदवारों को जल विभाग के बकाया, मूल्यांकन और संपत्ति कर, भवन की वैधता और पुलिस अनापत्ति (पीसीसी) का प्रमाण पत्र देने के लिए मजबूर किया गया।
कार्लोस ने उच्च न्यायालय को बताया कि याचिकाकर्ता उक्त चुनाव में उम्मीदवार नहीं था और इसलिए इस मामले में याचिका दाखिल करने का उसे कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने दलील दी कि याचिका विचारणीय नहीं है और इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए।
अदालत ने कार्लोस की दलीलों को स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश

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