Chhattisgarh High Court Judgment : शिक्षाकर्मी के आश्रितों के लिए बड़ी राहत! योग्यता न होने पर भी नहीं छिन सकती अनुकंपा नौकरी, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि मृत शिक्षक के आश्रित के पास शिक्षक पद की तकनीकी योग्यता नहीं है, तो भी उसे नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने संबंधित विभाग को रिक्त चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्ति पर विचार करने के निर्देश दिए हैं।
Chhattisgarh High Court Judgment / Image Source : FILE
- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर दिया बड़ा फैसला।
- तकनीकी योग्यता न होने पर भी आश्रित को नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता।
- कोर्ट ने रिक्त चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्ति पर विचार करने के दिए निर्देश।
रायपुर : Chhattisgarh High Court Judgment : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षाकर्मियों की अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि यदि किसी मृत शिक्षक के आश्रित के पास शिक्षक पद के लिए निर्धारित तकनीकी योग्यता नहीं है, तब भी उसे पूरी तरह नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच ने दुर्ग जिला पंचायत के पुराने आदेश को असंवैधानिक और मनमाना बताते हुए रद्द कर दिया है।
क्या है पूरा मामला ?
यह पूरा मामला दुर्ग जिले का है, जहां सहायक शिक्षक चमन लाल वर्मा का 15 अक्टूबर 2015 को निधन हो गया था। Compassionate Appointment Rules MP CG इसके बाद उनके बेटे राकेश कुमार वर्मा ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। लेकिन, दुर्ग जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 30 जुलाई 2018 को यह कहकर आवेदन खारिज कर दिया कि आवेदक के पास शिक्षक बनने के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता नहीं है। इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कई आश्रित नौकरी से वंचित
याचिकाकर्ता के वकील बी.पी. राव ने कोर्ट में दलील दी कि नीतियों में बदलाव के कारण कई आश्रित नौकरी से वंचित हो रहे हैं, जबकि नियम के तहत योग्यता न होने पर ग्राम पंचायत सचिव या अन्य उपयुक्त पदों पर विचार किया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मूल उद्देश्य परिवार को अचानक आए आर्थिक संकट से बचाना और सहारा देना है, न कि केवल तकनीकी योग्यता के आधार पर अवसर खत्म करना।
चतुर्थ श्रेणी पद की नियुक्ति पर किया जाए विचार
हाईकोर्ट ने दुर्ग जिला पंचायत का आदेश निरस्त करते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को निर्देश दिया है कि आवेदक की शैक्षणिक योग्यता के अनुसार किसी भी स्वीकृत और रिक्त चतुर्थ श्रेणी पद पर उसकी नियुक्ति पर विचार किया जाए। अदालत ने इस पूरी प्रक्रिया को आदेश मिलने के चार महीने के भीतर पूरा करने की समय-सीमा तय की है
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