वारकरी संप्रदाय पर सियासत तेज; पवार के बयान को कांग्रेस का समर्थन

वारकरी संप्रदाय पर सियासत तेज; पवार के बयान को कांग्रेस का समर्थन

वारकरी संप्रदाय पर सियासत तेज; पवार के बयान को कांग्रेस का समर्थन
Modified Date: April 12, 2026 / 01:57 pm IST
Published Date: April 12, 2026 1:57 pm IST

मुंबई, 12 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रवक्ता सचिन सावंत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) प्रमुख शरद पवार के उस बयान का रविवार को समर्थन किया, जिसमें उन्होंने वारकरी संप्रदाय में प्रतिगामी तत्वों की घुसपैठ का आरोप लगाया था।

सावंत ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि जाति, लैंगिक पहचान और धर्म से परे भक्ति और समानता का संदेश देने वाली वारकरी परंपरा अब नफरत फैलाने वाले तत्वों के निशाने पर है।

‘वारकरी’ शब्द पंढरपुर के भगवान विट्ठल के भक्तों के लिए प्रयोग किया जाता है, जो प्रतिवर्ष मंदिर नगर के लिए पदयात्रा करते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है और तुकाराम और नामदेव जैसे भक्ति परंपरा के महान कवियों को प्रेरित किया है।

एक पत्रिका में प्रकाशित लेख में पवार ने खेद व्यक्त किया कि हाल के दिनों में प्रतिगामी तत्व वारकरी परंपरा में प्रवेश कर गए हैं और संप्रदाय के कुछ उपदेशकों के प्रवचन धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देते हैं।

सावंत ने पवार के रुख का समर्थन करते हुए कहा, “वारकरी संप्रदाय ने ऐतिहासिक रूप से सामाजिक सुधार और जनजागरण में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन कुछ ताकतें जानबूझकर समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रही हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि संतों की शिक्षाओं और उनके भक्ति साहित्य में दखल देने की कोशिशें सदियों से जारी हैं और मौजूदा घटनाक्रम उसी सिलसिले की कड़ी है

पवार के धार्मिक विश्वासों को लेकर उठे सवालों पर सावंत ने कहा, “जहां तक शरद पवार के नास्तिक होने का सवाल है, हिंदू धर्म में नास्तिकता स्वीकार्य है। यहां तक कि हिंदुत्व विचारक बताए जाने वाले विनायक दामोदर सावरकर भी नास्तिक थे।”

उन्होंने कहा, “हम शरद पवार के विचारों से पूरी तरह सहमत हैं। आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़ी विभाजनकारी विचारधारा फैलाने वाले तथाकथित धर्मगुरुओं, स्वघोषित आध्यात्मिक नेताओं और कथावाचकों के जरिए वारकरी संप्रदाय में घुसपैठ की कोशिशें हो रही हैं।”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को पवार के आरोपों को खारिज करके पलटवार करते हुए दावा किया था कि कुछ “अर्बन नक्सल” से जुड़े लोग वारकरी आंदोलन में घुसपैठ कर गए थे, लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया।

फडणवीस ने कहा था, “पवार का लेख पूरी तरह गलत है और यह परंपरा की समझ की कमी को दर्शाता है।”

भाषा खारी अमित

अमित


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