पवई झील पानी से लबालब, लेकिन मुंबई की प्यास बुझाने वाले सात जलाशयों में पानी का संकट बरकरार

पवई झील पानी से लबालब, लेकिन मुंबई की प्यास बुझाने वाले सात जलाशयों में पानी का संकट बरकरार

पवई झील पानी से लबालब, लेकिन मुंबई की प्यास बुझाने वाले सात जलाशयों में पानी का संकट बरकरार
Modified Date: July 1, 2026 / 04:10 pm IST
Published Date: July 1, 2026 4:10 pm IST

मुंबई, एक जुलाई (भाषा) मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में हो रही भारी बारिश के बीच पूर्वी उपनगर में स्थित पवई झील बुधवार सुबह लबालब भर गई, लेकिन मुंबई को पीने के पानी की आपूर्ति करने वाले सात जलाशयों में जलभंडार पिछले साल की तुलना में अब भी बेहद कम है।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने बताया कि कृत्रिम पवई झील में सुबह करीब 5:30 बजे पानी अपनी तय सीमा से ऊपर के स्तर पर था। बीएमसी ने सोशल मीडिया पर बताया कि इस झील में 545 करोड़ लीटर पानी जमा करने की क्षमता है और इसके पानी का इस्तेमाल पीने के लिए नहीं बल्कि केवल कारखानों और औद्योगिक कार्यों के लिए होता है।

इस झील से निकलने वाला अतिरिक्त जल मीठी नदी में जाता है, और यह नदी आगे चलकर माहिम के पास समुद्र में मिल जाती है।

पिछले साल पवई झील 19 जून को ही सीमा से ऊपर तक भर गई थी। इस साल मुंबई में बारिश के मौसम की शुरुआत देर से हुई, इसीलिए झील में पानी का स्तर भी देरी से सीमाबिंदु के ऊपर पहुंचा।

बीएमसी के मुताबिक, पूरी तरह भरने पर इस झील का पानी लगभग 2.23 वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैल जाता है। वहीं, इसके आसपास का वो पूरा क्षेत्र जहां से वर्षा का पानी बहकर इस झील में आता है, वह 6.61 वर्ग किलोमीटर में फैला है।

बीएमसी मुख्यालय से लगभग 27 किलोमीटर दूर स्थित इस ऐतिहासिक पवई झील का निर्माणसाल 1890 में 40 लाख रुपये की लागत से किया गया था।

दूसरी तरफ, मुंबई के लोगों को पीने का पानी पहुंचाने वाले सात जलाशयों में बुधवार सुबह छह बजे तक उनकी कुल क्षमता का केवल 7.18 प्रतिशत पानी ही बचा था। अगर पिछले साल यानी 1 जुलाई 2025 की बात करें, तो उस समय इन जलाशयों में 41.17 प्रतिशत पानी मौजूद था।

मुंबई को भातसा, ऊपरी वैतरणा, मध्य वैतरणा, तानसा, मोदक सागर, विहार और तुलसी नाम सात अलग-अलग झीलों से हर दिन 385 करोड़ लीटर पीने का पानी मिलता है।

भाषा सुमित वैभव

वैभव


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