गणेशोत्सव से पहले डीजे, लाउडस्पीकर पर रोक की मांग कर रहे पुणे के कार्यकर्ता से मारपीट

गणेशोत्सव से पहले डीजे, लाउडस्पीकर पर रोक की मांग कर रहे पुणे के कार्यकर्ता से मारपीट

गणेशोत्सव से पहले डीजे, लाउडस्पीकर पर रोक की मांग कर रहे पुणे के कार्यकर्ता से मारपीट
Modified Date: September 3, 2026 / 07:16 pm IST
Published Date: September 3, 2026 7:16 pm IST

पुणे, तीन सितंबर (भाषा) गणेशोत्सव से पहले तेज आवाज वाले डीजे और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल का मुखर विरोध कर रहे शहर के सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट को बृहस्पतिवार सुबह एक व्यक्ति ने कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी राय रखने पर उसके साथ मारपीट करना गलत है।

यह घटना सुबह करीब 11 बजे तिलक रोड पर हुई, जब बापट मीडिया के प्रतिनिधियों से बात कर रहे थे। मारपीट की घटना कैमरे में भी कैद हो गई। पुलिस मौके पर पहुंची और कार्यकर्ता को पुलिस वैन में वहां से ले गई।

पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान संतोष चव्हाण के रूप में हुई है।

गृह विभाग का प्रभार संभाल रहे फडणवीस ने मुंबई में संवाददाताओं से कहा कि किसी की राय रखने पर उस पर हमला करना उचित नहीं है।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

फडणवीस ने कहा कि गणेशोत्सव पारंपरिक तरीके से मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह ‘‘100 प्रतिशत’’ संभव नहीं हो सकता, लेकिन इस दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।

पुणे के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने कहा, ‘‘हम बयान दर्ज कर रहे हैं। घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’’

बापट पिछले महीने उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने 14 सितंबर से शुरू होने वाले 10 दिवसीय गणेशोत्सव से पहले पुणे नगर निगम द्वारा आयोजित बैठक में डीजे और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल का विरोध किया था।

बैठक के दौरान उन्होंने तेज आवाज वाले डीजे संगीत और लाउडस्पीकर पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। इसके बाद गणेश मंडलों के प्रतिनिधि आक्रामक हो गए और पुलिस उन्हें इमारत से बाहर ले गई।

इस घटना का वीडियो और बाद में बापट द्वारा अपने विचार स्पष्ट मराठी में रखने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर काफी प्रसारित हुए और उन पर कई ‘मीम’ भी बनाए गए।

त्योहारों के दौरान ध्वनि प्रदूषण के सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के आधार पर बापट के रुख को महाराष्ट्र में बढ़ता समर्थन मिल रहा है और यह एक नागरिक आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है।

भाषा

राखी रंजन

रंजन


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