नागपुर, 27 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सत्ता में बैठे लोगों की प्रतिबद्धता और देश के प्रत्येक व्यक्ति के सहयोग से संभव हुआ तथा भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह पहले से ही ‘हिंदू राष्ट्र’ है।
आरएसएस की एक विज्ञप्ति के अनुसार वह रेशिमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन व्यक्तियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे, जिनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में मंदिर का निर्माण हुआ।
उन्होंने कहा कि मंदिर का निर्माण भगवान राम की इच्छा से हुआ। भागवत ने इसकी तुलना भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने से करते हुए कहा कि ऐसे कार्य तभी संभव होते हैं, जब सभी का योगदान हो।
उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार ने शपथ ली, तो लंदन के ‘द गार्डियन’ अखबार ने लिखा कि इस दिन भारत ने वास्तव में ब्रिटिश शासन को अलविदा कहा।
उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रतिबद्ध नेतृत्व के बिना राम मंदिर का निर्माण संभव था।
भागवत ने यह भी कहा कि एक समय हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र कहना उपहास का विषय हुआ करता था।
उन्होंने कहा, ‘हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है। राम मंदिर बनने तक लोग इस दावे पर हंसते थे। आज वही लोग कहते हैं कि हिंदुस्तान हिंदुओं की भूमि है।’
उन्होंने कहा कि कई लोग आरएसएस से भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने को कहते हैं, लेकिन हम कहते हैं कि जो बात पहले से ही सच है उसे घोषित करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
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राखी वैभव
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