शादी का हवाला देकर बलात्कार का मामला वापस नहीं लिया जा सकता: अदालत

शादी का हवाला देकर बलात्कार का मामला वापस नहीं लिया जा सकता: अदालत

शादी का हवाला देकर बलात्कार का मामला वापस नहीं लिया जा सकता: अदालत
Modified Date: June 16, 2026 / 04:20 pm IST
Published Date: June 16, 2026 4:20 pm IST

ठाणे, 16 जून (भाषा) महाराष्ट्र में ठाणे की एक सत्र अदालत ने एक मॉडल से कथित बलात्कार के आरोपी 27-वर्षीय एक व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

अदालत ने पीड़िता द्वारा अपनी प्रस्तावित शादी को बचाने के लिए प्रस्तुत किए गए ‘समझौता’ हलफनामे पर विचार करने से भी इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि यह अपराध समझौता योग्य नहीं है और इस मामले की जांच अभी जारी है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी. वी. घुले ने नौ जून को यह आदेश पारित किया, जिसकी प्रति 15 जून को उपलब्ध हुई।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, सूरत निवासी अक्षयकुमार कांतिलाल जैन को ठाणे की काशीमीरा पुलिस ने 25 अप्रैल को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64 (बलात्कार) और 351(2) (आपराधिक धमकी) के तहत गिरफ्तार किया था।

पंजाब की मूल निवासी 26-वर्षीय पेशेवर मॉडल ने आरोप लगाया है कि जैन उसे अभिनय के ‘ऑडिशन’ का झांसा देकर गोवा से मीरा रोड स्थित एक होटल में ले गया, जहां उसने कथित तौर पर उसकी चाय में नशीला पदार्थ मिला दिया और उसके साथ बलात्कार किया।

बचाव पक्ष ने सुनवाई के दौरान जमानत याचिका मंजूर करने का अनुरोध करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने एक नोटरीकृत शपथपत्र-सह-घोषणापत्र प्रस्तुत किया है, जिसमें उसने अपनी शादी तय होने का हवाला देते हुए आरोप वापस लेने की इच्छा जताई है।

अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह गंभीर और समझौता न किया जा सकने वाला अपराध है।

अतिरिक्त लोक अभियोजक मनीषा पावसे ने दलील दी कि आरोपी को जमानत दिए जाने का कोई आधार नहीं है।

जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायाधीश घुले ने कहा, “शादी प्रभावित होने की आशंका का जो कारण बताया गया है, वह अप्रासंगिक है। यह अपराध पूरे समाज के खिलाफ है, इसलिए इसमें कोई समझौता नहीं हो सकता। प्राथमिकी वापस लेने का प्रयास स्वतंत्र और स्वेच्छा से किया गया प्रतीत नहीं होता। शिकायतकर्ता प्राथमिकी वापस लेने का अनुरोध नहीं कर सकती।’’

अदालत ने पीड़िता के शपथपत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उससे यह संकेत मिलता है कि बलात्कार का अपराध हुआ है।

न्यायाधीश ने कहा, “शिकायतकर्ता को आशंका है कि यदि उसके होने वाले पति को इस घटना की जानकारी मिली तो उसका वैवाहिक जीवन प्रभावित हो सकता है। मीरा रोड स्थित होटल में उसके ठहरने के दौरान यौन संबंध स्थापित करने के लिए उसकी सहमति नहीं थी। यह ऐसा अपराध नहीं है, जिसमें समझौता किया जा सके।”

अदालत ने यह भी कहा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और आरोपपत्र दाखिल किया जाना बाकी है।

भाषा राखी सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में