Cyber Frauds: हैकर्स की नई चाल! iPhone और Android की इस खामी से आपके कॉन्टैक्ट्स हो सकते हैं चोरी, तुरंत जानें कैसे बचें
Cyber Frauds: यह सुरक्षा खामी iPhone और Android में इस्तेमाल होने वाली पुरानी ईमेल-टू-टेक्स्ट सेवा से जुड़ी है। इस फीचर के जरिए ईमेल को SMS में बदला जाता था। लेकिन इसी सिस्टम में मौजूद कमजोरी का फायदा उठाकर यूजर्स के कॉन्टैक्ट्स तक पहुंच संभव हो गई।
(Cyber Frauds/ Image Credit: Pexels)
- Email-to-Text सिस्टम की कमजोरी से खतरा पैदा हुआ था
- फर्जी नाम से असली जैसे मैसेज भेजे जा सकते थे
- Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म प्रभावित थे
Cyber Frauds: अक्सर लोग मानते हैं कि मोबाइल पर आने वाले टेक्स्ट मैसेज पूरी तरह सुरक्षित होते हैं और जो नाम स्क्रीन पर दिखता है, वही असली भेजने वाला होता है। लेकिन हाल ही में सामने आई एक गंभीर सुरक्षा खामी ने इस भरोसे पर सवाल खड़े कर दिए थे। इस कमजोरी का फायदा उठाकर साइबर अपराधी किसी भी भरोसेमंद व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी मैसेज भेज सकते थे जो देखने में बिल्कुल असली लगते थे। अब इस समस्या को ठीक कर दिया गया है। जिससे यूजर्स को बड़ी राहत मिली है।
कैसे सामने आई यह सुरक्षा खामी?
इस खामी का पता कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो के कंप्यूटर वैज्ञानिकों ने लगाया। यह समस्या Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर मौजूद थी। साथ ही कई मोबाइल नेटवर्क भी इससे प्रभावित थे। यह खामी एक पुराने सिस्टम से जुड़ी थी। जिसे Email-to-Text सेवा कहा जाता है जिसमें ईमेल को सीधे SMS में बदलकर मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है।
Email-to-Text सिस्टम कैसे बना कमजोरी की वजह
ईमेल और SMS दो अलग-अलग तकनीक पर काम करते हैं। जब किसी ईमेल को टेक्स्ट मैसेज में बदला जाता है तो नेटवर्क कंपनियों को कई जानकारियों को एक फॉर्मेट से दूसरे में बदलना पड़ता है। इसी प्रक्रिया में भेजने वाले की पहचान पूरी तरह स्पष्ट नहीं रहती थी। साइबर अपराधी इस कमजोरी का फायदा उठाकर अपने असली ईमेल एड्रेस को छिपा सकते थे और मैसेज को किसी और व्यक्ति के नाम से दिखा सकते थे।
फर्जी मैसेज से कॉन्टैक्ट्स को धोखा देने का खतरा
शोधकर्ताओं के मुताबिक, हमलावर ईमेल एड्रेस में खास बदलाव और कैरेक्टर का इस्तेमाल करके सिस्टम को भ्रमित कर सकते थे। इसके बाद फोन की मैसेजिंग ऐप यह मान लेती थी कि मैसेज किसी सेव किए गए कॉन्टैक्ट से आया है। ऐसे में स्क्रीन पर किसी दोस्त या परिवार के सदस्य का नाम दिखता था। जबकि मैसेज किसी अनजान व्यक्ति ने भेजा होता था। कुछ मामलों में यह फर्जी मैसेज पुरानी चैट के बीच भी जुड़ सकता था। जिससे धोखाधड़ी का खतरा और बढ़ जाता था।
सुरक्षा सुधार के बाद मिली राहत
इस गंभीर खामी के सामने आने के बाद मोबाइल कंपनियों और नेटवर्क ऑपरेटर्स ने तुरंत कदम उठाए। मैसेज भेजने वाले की पहचान को बेहतर तरीके से वेरिफाई करने के लिए नए सुरक्षा अपडेट जारी किए गए। साथ ही मैसेजिंग सिस्टम में जरूरी बदलाव किए गए ताकि इस तरह की स्पूफिंग दोबारा न हो सके।
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