बोलने के अधिकार के साथ-साथ सुनने की क्षमता भी होनी चाहिए: मोदी की ‘नाराज फूफा’ वाली टिप्पणी पर सुले
बोलने के अधिकार के साथ-साथ सुनने की क्षमता भी होनी चाहिए: मोदी की 'नाराज फूफा' वाली टिप्पणी पर सुले
नागपुर, छह सितंबर (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आलोचकों के लिए ‘नाराज फूफा’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मजबूत लोकतंत्र में बोलने के अधिकार के साथ सुनने की क्षमता भी होनी चाहिए और आलोचना करने का अधिकार सभी को है।
सुले ने नागपुर हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘जिस तरह हमारे पास बोलने की शक्ति है, उसी तरह सुनने की शक्ति भी है। जिस मजबूत लोकतंत्र में मेरा विश्वास है, उसमें उन्हें हमारी आलोचना करने का अधिकार है।’’
मोदी ने रविवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा था कि परिसर से बाहर छात्रों को दो तरह के लोग मिलेंगे, एक वे जो समाज की शक्ति को राष्ट्र की शक्ति में बदलते हैं और दूसरे वे जो किसी काम के शुरू होते ही ‘नाराज फूफा’ बन जाते हैं।
विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन का नेतृत्व सुले, ममता बनर्जी या प्रियंका वाद्रा जैसी किसी महिला नेता के द्वारा किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कौन पहले आगे आता है और कौन बाद में, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
सुले ने कहा, ‘‘हम सभी देश की सेवा में लगे हैं और देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति बेहद चिंताजनक है। हम सभी का नेतृत्व कौन करता है, यह महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन देश की स्थिति चिंताजनक है और इस पर ध्यान देने की जरूरत है।’’
भाषा
राखी नरेश
नरेश

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