भाजपा का समर्थन करने के लिए शिवसेना (उबाठा) पार्षदों को एक-एक करोड़ रुपये मिले: मनसे नेता का दावा
भाजपा का समर्थन करने के लिए शिवसेना (उबाठा) पार्षदों को एक-एक करोड़ रुपये मिले: मनसे नेता का दावा
मुंबई, 12 फरवरी (भाषा) ठाकरे बंधुओं के नेतृत्व वाले दलों के बीच बढ़ते तनाव के संकेत देते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के पार्षदों ने महापौर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करने के लिए एक-एक करोड़ रुपये प्राप्त किए।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
महाविकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन में शामिल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बीच उस समय से तनातनी चल रही है जब कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद, शिवसेना (उबाठा) पार्षदों के समर्थन से चंद्रपुर नगर निगम में भाजपा प्रत्याशी महापौर चुन लिया गया।
राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे की मुंबई इकाई के अध्यक्ष देशपांडे ने कहा कि जब शिवसेना (उबाठा) भाजपा का समर्थन करती है तो उसे सही आचरण माना जाता है लेकिन जब मनसे ऐसा करती है तो उसे गलत ठहराया जाता है।
वह कल्याण-डोंबिवली में स्थानीय निकाय चुनाव के बाद मनसे के स्थानीय नेताओं द्वारा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन देने के फैसले का जिक्र कर रहे थे, जिसकी शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने आलोचना की थी।
देशपांडे ने दावा किया, ‘‘चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के प्रत्येक पार्षद को एक करोड़ रुपये मिले, इसके अलावा अन्य प्रस्ताव भी दिए गए। एक निर्दलीय पार्षद को 50 लाख रुपये दिए गए।’
मुंबई में हुए निकाय चुनाव में शिवसेना (उबाठा) और मनसे ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था लेकिन वे भाजपा-शिवसेना गठजोड़ को बृहन्मुंबई महानगरपालिका पर नियंत्रण हासिल करने से नहीं रोक सके।
शिवसेना (उबाठा) के चंद्रपुर जिला अध्यक्ष संदीप गिरहे ने कहा कि यदि देशपांडे पार्षदों को धन मिलने के आरोप का प्रमाण पेश कर दें तो वह इस्तीफा दे देंगे।
उन्होंने स्थानीय कांग्रेस नेताओं पर शिवसेना (उबाठा) नेतृत्व का अपमान करने का भी आरोप लगाया।
देशपांडे ने संजय राउत पर भी निशाना साधते हुए पूछा कि चंद्रपुर में हुए घटनाक्रम के दौरान क्या उन्हें अंधेरे में रखा गया था या उन्होंने आंखों पर पट्टी बांध रखी थी।
वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि देशपांडे के आरोपों को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा और यह शिवसेना (उबाठा) और मनसे के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है।
इसी बीच, संजय राउत ने बृहस्पतिवार को मुंबई में मनसे प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात की।
राउत ने संवाददाताओं से कहा कि चंद्रपुर में हुए घटनाक्रम के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है और उसे स्थानीय शिवसेना (उबाठा) पार्षदों के साथ अधिक गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि सांसद प्रतिभा धनोरकर और विजय वडेट्टीवार के नेतृत्व वाले स्थानीय कांग्रेस गुट सहमति बनाने में विफल रहे।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल से भी बात हुई है।
राज्यसभा सदस्य राउत ने कहा, ‘‘उद्धव ठाकरे स्वयं इस मामले पर नजर रखे हुए हैं। चंद्रपुर के पार्षदों को एक-दो दिन में मुंबई बुलाया जाएगा। उद्धव ठाकरे का स्पष्ट रुख है कि किसी भी परिस्थिति में पार्टी ऐसा कोई कदम न उठाए जिससे भाजपा को लाभ हो और यह रुख आज भी कायम है।’
गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस को मंगलवार को उस समय झटका लगा जब प्रतिद्वंद्वी शिवसेना (उबाठा) और भाजपा के अप्रत्याशित समीकरण के चलते चंद्रपुर में भाजपा की प्रत्याशी को महापौर चुना गया।
भाजपा की संगीता खांडेकर ने कांग्रेस उम्मीदवार वैशाली महादुले को एक वोट से हराकर महापौर पद जीता, जबकि शिवसेना (उबाठा) के प्रशांत दानव उपमहापौर निर्वाचित हुए।
इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकजुटता और महाविकास आघाड़ी की व्यवहारिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भाषा
राखी संतोष
संतोष

Facebook


