शिवाजी-टीपू बयान विवाद: पुणे हिंसा पर भाजपा, कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज
शिवाजी-टीपू बयान विवाद: पुणे हिंसा पर भाजपा, कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज
पुणे, 16 फरवरी (भाषा) कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल द्वारा टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के ‘समकक्ष’ बताए जाने संबंधी टिप्पणी के विरोध में हुई हिंसा के बाद पुणे पुलिस ने भाजपा और कांग्रेस की पुणे इकाई के अध्यक्षों तथा कई कार्यकर्ताओं के खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
रविवार को पुणे में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प के दौरान पथराव भी किया गया । भाजपा कार्यकर्ता सपकाल की टिप्पणियों का विरोध कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, इस घटना में दोनों दलों के कार्यकर्ताओं, दो पुलिसकर्मियों और दो पत्रकारों समेत नौ लोग घायल हो गए।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर स्थानीय भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
एक अधिकारी ने बताया कि एक मामला भाजपा की पुणे शहर इकाई के अध्यक्ष धीरज घाटे, स्थानीय युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दुष्यंत मोहोल और 50 से 60 अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज किया गया है। दूसरा मामला कांग्रेस की पुणे शहर इकाई के अध्यक्ष अरविंद शिंदे, दो अन्य स्थानीय नेताओं और कुछ अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज किया गया है।
कांग्रेस भवन के पास रविवार को हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और वे दीवारों पर चढ़ गए। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान पथराव की घटनाएं हुईं।
महाराष्ट्र में शुक्रवार को मालेगांव महानगरपालिका की उप-महापौर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के कार्यालय में टीपू सुल्तान का चित्र लगाए जाने को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया। शिवसेना पार्षदों और हिंदू संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
सपकाल ने घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता और ‘स्वराज’ के विचार को पेश करने के उनके तरीके का जिक्र किया था और टीपू सुल्तान के अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध का आह्वान करने का उदाहरण दिया था। उन्होंने दावा किया था कि यह लड़ाई शिवाजी महाराज के आदर्श की तर्ज पर थी।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने सपकाल के इस बयान की निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया था।
भाषा प्रचेता शोभना
शोभना

Facebook


