ठाणे, 18 फरवरी (भाषा) ठाणे की एक अदालत ने 10 साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के आरोपी 32 वर्षीय व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि यह मामला शादी के प्रस्ताव को लेकर पीड़िता की मां के साथ व्यक्तिगत विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है।
यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) से जुड़े मामलों की विशेष अदालत के न्यायाधीश डी एस देशमुख ने 13 फरवरी के फैसले में कहा कि आरोपी एवं पीड़िता की मां के बीच संबंध थे और जब आरोपी ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया तो उनके बीच झगड़ा हुआ।
अदालत ने कहा कि पीड़िता को सिखाए-पढ़ाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता और यौन उत्पीड़न के आरोप साबित करने के लिए उसकी गवाही भरोसा करने लायक नहीं लगती।
अभियोजन के मुताबिक, यह घटना 11 अगस्त 2019 को हुई थी, जब 10 वर्षीय पीड़िता और उसकी मां महाराष्ट्र में ठाणे जिले के मुंब्रा इलाके में एक बाजार से लौट रही थीं।
अभियोजन ने आरोप लगाया कि स्थानीय चाय विक्रेता मोहम्मद नाशिर रैन ने बच्ची को पीछे से पकड़कर गले लगा लिया और अश्लील हरकतें कीं तथा मां के हस्तक्षेप करने पर आरोपी ने उस पर हमला किया, जिससे उसकी हड्डी टूट गई।
आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और पॉक्सो के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए थे।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि शिकायतकर्ता (नाबालिग लड़की की मां) और आरोपी के बीच काफी समय से संबंध थे और कानूनी कार्रवाई बदला लेने के लिए की गई।
अदालत ने कहा कि अभियोजन दोष सिद्ध करने के लिए जरूरी ‘‘आधारभूत तथ्यों’’ को साबित करने में विफल रहा और मां एवं बेटी की गवाही में उल्लेखनीय असंगतियां पाईं।
अदालत ने कहा कि मां ने स्वीकार किया कि वह आरोपी के साथ दो बार एक ‘लॉज’ में गई थी और आरोपी द्वारा उससे शादी करने से इनकार किए जाने के कारण दोनों के बीच झगड़ा हुआ।
अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि लड़की की मां एवं आरोपी के बीच संबंध थे और जब आरोपी उससे शादी करने को लेकर राजी नहीं हुआ तो उनके बीच झगड़ा हुआ।
उसने कहा कि मां ने झड़प में उसके हाथ की हड्डी टूट जाने का दावा किया था लेकिन चिकित्सकीय साक्ष्य इस दावे का समर्थन नहीं करते।
भाषा सिम्मी मनीषा
मनीषा