मुंबई महापौर चुनाव में शिंदे गुट का समर्थन मांगने को लेकर शिवसेना (उबाठा) में असहमति नजर आ रही

मुंबई महापौर चुनाव में शिंदे गुट का समर्थन मांगने को लेकर शिवसेना (उबाठा) में असहमति नजर आ रही

मुंबई महापौर चुनाव में शिंदे गुट का समर्थन मांगने को लेकर शिवसेना (उबाठा) में असहमति नजर आ रही
Modified Date: January 23, 2026 / 08:51 pm IST
Published Date: January 23, 2026 8:51 pm IST

मुंबई, 23 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के बाद सत्ता को लेकर जारी खींचतान के बीच शुक्रवार को शिवसेना (उबाठा) के भीतर आगामी मुंबई महापौर चुनाव में एकनाथ शिंदे-नीत शिवसेना से समर्थन लेने को लेकर अलग-अलग सुर सुनाई दिए।

हालांकि, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस तरह की किसी भी संभावना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मुंबई का अगला महापौर महायुति गठबंधन से ही होगा, जिसमें शिवसेना और भाजपा शामिल हैं।

शिंदे ने स्पष्ट किया कि महानगर में महायुति की ताकत को देखते हुए महापौर पद पर उसी गठबंधन का उम्मीदवार काबिज होगा।

शिवसेना (उबाठा) में बीएमसी महापौर चुनाव को लेकर मतभेद और गहराते नजर आए। पार्टी विधायक भास्कर जाधव ने कहा कि शिवसेना को महापौर चुनाव में सहयोगी भाजपा के बजाय उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए।

वहीं, पार्टी सांसद संजय राउत ने इस विचार का विरोध करते हुए साफ किया कि किसी भी परिस्थिति में प्रतिद्वंद्वी खेमे से समर्थन नहीं मांगा जाएगा। राउत ने दो टूक कहा कि शिवसेना (उबाठा) अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगी।

जाधव ने कहा कि अगर शिंदे गुट शिवसेना (उबाठा) को समर्थन देता है, तो यह शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के जन्म शताब्दी वर्ष में उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

बृहस्पतिवार को हुई लॉटरी प्रक्रिया में मुंबई के महापौर पद को सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित किया गया। उद्धव ठाकरे-नीत पार्टी को उम्मीद थी कि यह पद अनुसूचित जनजाति (एसटी) की महिला के लिए आरक्षित होगा, क्योंकि उस श्रेणी में पात्र दोनों उम्मीदवार शिवसेना (उबाठा) की थीं।

बीएमसी चुनाव में भाजपा ने 89 सीट हासिल कीं, जबकि शिंदे-नीत शिवसेना को 29 सीट मिलीं, जिससे गठबंधन बहुमत के आंकड़े (114) को पार कर गया।

वहीं, शिवसेना (उबाठा) ने 65 सीट जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को छह और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को एक सीट मिली।

जाधव ने संवाददाताओं से कहा कि बाल ठाकरे के जन्म शताब्दी वर्ष में बीएमसी में उनके द्वारा स्थापित शिवसेना का महापौर न होने की संभावना बेहद कष्टदायक है।

उन्होंने कहा, “जो लोग बालासाहेब के विचारों को आगे बढ़ाने की बात करते हैं और खुद को उनका असली उत्तराधिकारी बताते हैं, उनसे मेरी अपील है कि वे बीएमसी चुनाव में बालासाहेब की असली शिवसेना (उबाठा) के उम्मीदवार का समर्थन करें। यही उनके जन्म शताब्दी वर्ष में उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

जाधव ने कहा कि शिंदे को भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि केंद्र और राज्य में गठबंधन होने के बावजूद उनकी पार्टी बीएमसी के महापौर पद के चुनाव में शिवसेना (उबाठा) का समर्थन करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप (शिंदे) खुद को बालासाहेब की विरासत का असली उत्तराधिकारी मानते हैं, तो आपको भाजपा का समर्थन नहीं करना चाहिए।’’

जाधव ने कहा कि अगर शिंदे वास्तव में बाल ठाकरे के आदर्शों में विश्वास रखते हैं, तो उन्हें इस मुद्दे पर उदारता दिखानी चाहिए।

शिवसेना (उबाठा) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने इससे उलट रुख अपनाते हुए साफ कहा कि उनकी पार्टी एकनाथ शिंदे से किसी भी सूरत में समर्थन नहीं लेगी।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राउत ने कहा, ‘‘सत्ता से बाहर रहकर हम मर नहीं जाएंगे। किसी भी हालत में हम शिंदे का समर्थन नहीं लेंगे।’’

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने साफ कहा कि मुंबई को महायुति का ही महापौर मिलेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र में हम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ हैं और राज्य में महायुति के तहत साथ काम कर रहे हैं। हम अपनी विचारधारा के साथ आगे बढ़ेंगे। मुंबई में शिवसेना-भाजपा महायुति का ही महापौर होगा।’’

भाषा राखी सुरेश

सुरेश


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