नागपुर, 29 मई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी के उदय पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक वरिष्ठ नेता ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय लोकतंत्र में सभी आवाजों और भावनाओं को समायोजित करने की क्षमता है और ‘जेन जेड’ को देश पर भरोसा है।
‘जेन जेड’ वे युवा हैं जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि भारत लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करता है, पारदर्शी चुनाव कराता है और सोशल मीडिया सहित यहां खुला मीडिया है।
वे कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मुझे लगता है कि लोकतंत्र में किसी भी तरह की चर्चा और लोगों द्वारा रखे और व्यक्त किए जाने वाले विभिन्न विचारों को आश्चर्य की तरह नहीं लिया जाना चाहिए। उन्हें सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए… मेरा मानना है कि मीडिया उन्हें संभालने के लिए पर्याप्त रूप से स्वतंत्र है। राजनीतिक दल भी मौजूद हैं और सक्षम हैं… हमारी कोई भी संस्था कमजोर नहीं है।’’
आंबेकर ने कहा, ‘‘हमारी जनता की शक्ति, हमारा लोकतंत्र मजबूत है। मेरा मानना है कि हमारे लोकतंत्र में हर किसी की आवाज और भावनाओं को शामिल करने की क्षमता है, और लोगों को इस पर भरोसा करना चाहिए। आरएसएस को इस पर पूरा विश्वास है।’’
उन्होंने कहा कि भारत के युवा या ‘जेन जेड’ बेहद आशावादी हैं और देश पर उनका अटूट विश्वास है, और वे संवैधानिक ढांचे के भीतर रहकर काम करते हैं।
आंबेकर ने कहा, ‘‘लोकतंत्र में विभिन्न मुद्दे उठते हैं और उन्हें सुलझाने के लोकतांत्रिक तरीके होते हैं।’’
आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की ओर से ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए गए उस साक्षात्कार के बारे में पूछे जाने पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के साथ संवाद के लिए हमेशा गुंजाइश होनी चाहिए, आंबेकर ने कहा कि संघ हमेशा से मानता आया है कि लोगों के बीच बातचीत से समस्याओं का समाधान हो सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर वार्ता करना एक राजनीतिक और कूटनीतिक निर्णय है। आंबेकर ने कहा, ‘‘यह सच है कि जब चीजें आधिकारिक चैनलों के माध्यम से आगे नहीं बढ़ रही हैं, तो उन्होंने (होसबाले) कहा है कि दोनों देशों के लोगों के बीच जो संवाद अभी हो रहा है, उसे जारी रखना चाहिए। कुछ मुद्दे अभी भी उठते हैं, और व्यापार अब भी जारी है, इसे बनाए रखना चाहिए ताकि संबंध मजबूत रहें, और धीरे-धीरे कुछ चीजें सुलझ जाएंगी।’’
उन्होंने कहा कि आरएसएस हमेशा से भारत के विभाजन का विरोधी रहा है और अगर उस समय संगठन मजबूत रहा होता, तो विभाजन कभी नहीं होता।
भाषा संतोष वैभव
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