उद्धव एवं राज ने मुंबई रैली में मराठी मानुष की बात की, भाजपा के हिंदुत्व को बताया ‘फर्जी’

उद्धव एवं राज ने मुंबई रैली में मराठी मानुष की बात की, भाजपा के हिंदुत्व को बताया 'फर्जी'

  •  
  • Publish Date - January 12, 2026 / 12:52 AM IST,
    Updated On - January 12, 2026 / 12:52 AM IST

मुंबई, 11 जनवरी (भाषा) शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई एवं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने नगर निकाय चुनावों के लिए रविवार को एक संयुक्त रैली में भाजपा के ‘फर्जी हिंदुत्व’ की आलोचना करते हुए कहा कि मुंबई पर मंडरा रहे ‘खतरे’ के कारण वे राजनीतिक रूप से एकजुट हुए हैं।

15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय चुनाव से पहले मुंबई की इस अंतिम संयुक्त रैली में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्होंने और राज ठाकरे ने मराठी मानुष, हिंदुओं और महाराष्ट्र के लिए अपने मतभेदों को भुला दिया है।

उन्होंने और राज ठाकरे ने खुद को मुंबई को बचाने के लिए एकमात्र विकल्प के रूप में पेश किया।

मराठी वोट बैंक को साधते हुए राज ठाकरे ने कहा कि दोनों भाई इसलिए साथ आए हैं क्योंकि मुंबई एक गंभीर खतरे का सामना कर रही है।

दोनों नेताओं ने भाजपा पर मुंबई को ‘लूटने’ और इसे गुजरात से जोड़ने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि मुंबई और महाराष्ट्र की संपत्तियां गौतम अदाणी के नेतृत्व वाले समूह को सौंपी जा रही हैं।

राज ने आरोप लगाया कि 2014 में सत्ता में आने के बाद से भारतीय जनता पार्टी सरकार लगातार अदाणी का पक्ष ले रही है।

उन्होंने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाओं का हवाला देते हुए कहा, ‘दीर्घकालिक योजना मुंबई को गुजरात से जोड़ने की है। यदि बीएमसी हमारे पास रही, तो वे अदाणी को जमीन नहीं बेच पाएंगे।’

उन्होंने कहा, ‘‘यह मराठी मानुष का आखिरी चुनाव है। अगर उन्होंने अब कोई गलती की, तो मुंबई की लड़ाई हमेशा के लिए हार जाएंगे।’’

राज के बाद रैली को संबोधित करते हुए शिवसेना (उबाठा) प्रमुख ने सवाल उठाया कि क्या भाजपा मुंबई का नाम बदलकर “बंबई” रखना चाहती है। उन्होंने इसके लिए तमिलनाडु के भाजपा नेता के. अन्नामलाई की टिप्पणियों का हवाला दिया।

चुनाव से पहले भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उद्धव ने कहा, “भाजपा का हिंदुत्व और राष्ट्रवाद नकली है।”

उन्होंने कहा, “भाजपा एक ऐसी पार्टी बन गई है जो राष्ट्र को पहले रखने की बजाय भ्रष्टाचार को पहले रखती है।”

भाषा सुमित अविनाश सिम्मी

सिम्मी