भारतीय नागरिकता के लिए घुसपैठियों का आधार का इस्तेमाल करना चिंताजनक: उच्च न्यायालय

भारतीय नागरिकता के लिए घुसपैठियों का आधार का इस्तेमाल करना चिंताजनक: उच्च न्यायालय

भारतीय नागरिकता के लिए घुसपैठियों का आधार का इस्तेमाल करना चिंताजनक: उच्च न्यायालय
Modified Date: August 26, 2026 / 04:48 pm IST
Published Date: August 26, 2026 4:48 pm IST

मुंबई, 26 अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि विदेशी नागरिकों का सीमा पार कर अंदर आना और भारतीय नागरिकता का दावा करने के लिए धोखाधड़ी से आधार एवं पैन कार्ड जैसे दस्तावेज़ हासिल करना ‘‘चिंताजनक’’ है, तथा केंद्र को समस्या से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।

न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने कहा कि यह ‘पैटर्न’ अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल और दस्तावेज़ों की जांच में एक गंभीर खामी को दिखाता है।

पीठ ने उल्लेख किया कि ऐसे लोगों का पता लगाकर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर देश से बाहर भेजना ज़रूरी है, क्योंकि कई मामलों में ऐसे लोग देश-विरोधी गतिविधियों में भी शामिल पाए गए हैं।

इसने केंद्र सरकार के संबंधित विभाग को आधार अधिनियम में आवश्यक बदलाव करने पर विचार करने का आदेश दिया, ताकि जांच एजेंसियों को ऐसे लोगों का तुरंत पता लगाने, उन्हें देश से बाहर भेजने और दुबारा आने से रोकने में मदद मिल सके।

पिछले महीने दिए गए आदेश में पीठ ने कहा कि उसने एक ‘‘चिंताजनक पैटर्न’’ देखा है, जिसमें विदेशी नागरिक भारत की सीमा में घुसपैठ करते हैं, अपनी असली पहचान छिपाने के लिए धोखाधड़ी से आवश्यक दस्तावेज हासिल करते हैं और फिर भारतीय नागरिकता का दावा करने के लिए आधार कार्ड बनवा लेते हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘यह पैटर्न अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल और दस्तावेज़ों की जांच-पड़ताल की प्रक्रियाओं में एक बड़ी खामी को दिखाता है।’’

इसने कहा कि सभी राज्य और केंद्रीय एजेंसियों को प्राथमिकता के आधार पर ऐसे विदेशी नागरिकों का पता लगाने और उन्हें निर्वासित करने के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे।

अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे मामलों में जांच तय समयसीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए, ताकि घुसपैठिए प्रक्रियाओं में देरी का फायदा न उठा सकें।

पीठ ने कहा कि मानव तस्करी और सीमा पार से घुसपैठ जैसी समस्याओं की गंभीरता तथा ऐसे मामलों को जल्द हल करने की आवश्यकता को देखते हुए, सरकार के लिए इनसे निपटने की प्रक्रिया बनाना बहुत ज़रूरी है।

अदालत ने महाराष्ट्र सरकार की एक याचिका पर यह आदेश दिया। इस याचिका में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को यह निर्देश देने का आग्रह किया गया था कि वह अफ़ग़ानिस्तान के रहने वाले माजिद खान शाह की पहचान से जुड़ी जानकारी और सत्यापन रिकॉर्ड का खुलासा करे।

आरोप है कि वह वीजा की समयसीमा खत्म होने के बाद भी भारत में रुका रहा और बाद में उसने अपना असली पासपोर्ट नष्ट कर दिया तथा मिराज ताहिर खान के नाम से एक झूठी पहचान अपना ली।

इस व्यक्ति ने पैन कार्ड, आधार कार्ड और स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र जैसे नकली और जाली पहचान दस्तावेज़ भी हासिल कर लिए, जिनका इस्तेमाल कर उसने भारतीय पासपोर्ट बनवाया।

पुलिस ने 2019 में, खान और उन कई अन्य लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया, जिन्होंने फर्ज़ी दस्तावेज़ तैयार करने में उसकी मदद की थी।

अदालत ने यूआईडीएआई को आदेश दिया कि वह खान का आधार बनाने की प्रक्रिया के समय जमा किए गए ज़रूरी दस्तावेज़ दो हफ़्ते के अंदर पुलिस को सौंप दे।

इसने आदेश में यह भी कहा कि सक्षम आव्रजन अधिकारी चार हफ़्ते के भीतर खान के ख़िलाफ़ देश से निकालने की कार्यवाही भी शुरू करें।

भाषा नेत्रपाल मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में