अगली पटकथा का नहीं, सही पटकथा का इंतजार करें: मोना सिंह
अगली पटकथा का नहीं, सही पटकथा का इंतजार करें: मोना सिंह
(कोमल पंचमटिया)
मुंबई, तीन अप्रैल (भाषा) इन दिनों कामयाबी की राह पर चल रहीं अभिनेत्री मोना सिंह के पास प्रस्तावों की कमी नहीं है लेकिन उनका कहना है कि वह सोचसमझ कर अपनी पटकथा चुनती हैं ताकि उन्हें चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं मिलें।
पिछले कुछ महीनों में सिंह ने फिल्मों और ओटीटी शो में एक अभिनेत्री के रूप में अविश्वसनीय प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में एक मां की भूमिका निभाने के बाद उन्होंने ‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ में एक सनकी गैंगस्टर, ‘बॉर्डर 2’ में एक सैनिक की समर्पित पत्नी, ‘कोहरा 2’ में अपराधियों का पीछा करने वाली एक दुखी पुलिस अधिकारी और ‘सूबेदार’ में एक रेत माफिया रानी की भूमिका निभाई।
सिंह ने कहा कि लोग जिसे सफलता मानते हैं, वह सही चुनाव का परिणाम है।
सिंह ने ‘पीटीआई भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में बताया, ‘मैं अगली पटकथा का इंतजार नहीं करती, मैं सही पटकथा का इंतजार करती हूं, जो मेरे दिल को छू जाए, जो मुझे अभिनय करने के अधिक अवसर दे, प्रयोग करने के लिए अधिक अवसर दे और एक अभिनेत्री के रूप में मेरे लिए चुनौतीपूर्ण हो…।’
उन्होंने कहा, ‘इसकी वजह से मेरी रातों की नींद उड़ जाए। सेट पर जाने से पहले मुझे थोड़ी घबराहट हो। मुझे यह सब महसूस करना जरूरी है।’
सिंह को ‘3 इडियट्स’, ‘लाल सिंह चड्ढा’, ‘मुंज्या’ जैसी फिल्मों और ‘मेड इन हैवेन’ जैसी सीरीज में अपने काम के लिए खासी सराहना मिली है।
कम समय में कई फिल्मों की रिलीज होने से अक्सर अभिनय करने वालों में ‘अब बहुत हो गया’ का डर पैदा हो जाता है, लेकिन 44 वर्षीय अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें अभी तक तो ऐसा महसूस नहीं हुआ है।
सिंह ने कहा, ‘यह भूमिकाओं की विविधता है। मैं खुद को दोहरा नहीं रही हूं। शुक्र है कि मुझे इतने अलग-अलग अवसर और अलग-अलग तरह के किरदार निभाने को मिल रहे हैं। मुझे कभी इस बात का डर नहीं लगता कि ‘ओह, मैंने बहुत कर लिया।’
उनका यह भी कहना है कि अपनी असफलता के दौर से निपटना भी उन्हें आता है। उनके अनुसार, असफलता के दौर में उनका साथ उनके रेस्तरां के कारोबार, यात्राओं, योग, बागवानी और कुत्ते पालने के शौक ने दिया।
भाषा
शुभम मनीषा
मनीषा

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