मुंबई के एक अस्पताल में प्रतिरोपण प्रक्रिया के दौरान युवक को मिले नए हाथ

मुंबई के एक अस्पताल में प्रतिरोपण प्रक्रिया के दौरान युवक को मिले नए हाथ

मुंबई के एक अस्पताल में प्रतिरोपण प्रक्रिया के दौरान युवक को मिले नए हाथ
Modified Date: January 20, 2026 / 06:53 pm IST
Published Date: January 20, 2026 6:53 pm IST

मुंबई, 20 जनवरी (भाषा) खेती-बाड़ी से जुड़े एक हादसे में अपने दोनों हाथ गंवाने वाले 18 वर्षीय एक युवक को मुंबई के एक निजी अस्पताल में प्रतिरोपण प्रक्रिया के माध्यम से दोनों नये हाथ वापस मिल गये तथा उसे सामान्य जीवन जीने का नया मौका मिला है।

गुजरात के राजकोट जिले के एक किसान के बेटे प्रियांक अघेरा ने जनवरी 2024 में अपने पिता को कपास की कटाई में मदद करते समय अपने दोनों हाथ गंवा दिए थे।

सूरत की रहने वाली 50 वर्षीय एक महिला के परिवार ने उनकी मौत के बाद उनके अंगों के दान के लिए सहमति दी और 13 घंटे की एक जटिल शल्य प्रक्रिया के बाद उनके हाथों को युवक में प्रतिरोपित कर दिया गया।

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नानावती मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में प्लास्टिक, रिकंस्ट्रक्टिव माइक्रो सर्जरी एंड हैंड ट्रांसप्लांटेशन विभाग के निदेशक डॉ. नीलेश सतभाई और उनकी टीम ने यह सर्जरी की।

डॉ. सतभाई ने बताया, “यकृत, गुर्दे और हृदय जैसे अंगों के दान के प्रति जागरूकता तो बढ़ी है लेकिन हाथ का दान अब भी दुर्लभ है क्योंकि हाथ दिखाई देने वाले बाहरी अंग हैं और शोक के समय (इसका दान करने में) परिवार वाले हिचकिचाते हैं।”

उन्होंने बताया कि यह प्रतिरोपण दर्शाता है कि समय पर प्राप्त शव दान से इस तरह की जटिल प्रक्रियाएं संभव हो सकती हैं।

डॉ. सतभाई ने बताया, “ हाथ प्रतिरोपण से ऐसे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं, जो अक्सर कृत्रिम अंगों से नहीं मिल पाते। इस सफल सर्जरी के जरिये युवा मरीज शिक्षा, काम और स्वयं की देखभाल फिर से कर सकता है।”

भाषा जितेंद्र माधव

माधव


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