मुंबई, 16 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि युवाओं को ज्ञान अर्जित करने के लिए विदेश जाने में हिचकिचाना नहीं चाहिए, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी शिक्षा और दक्षता का उपयोग अंततः भारत के विकास के हेतु हो।
छत्रपति संभाजीनगर के दो दिवसीय दौरे पर आए भागवत ने कहा कि आज के युवा प्रबल रूप से देशभक्त हैं और यह भावना जितनी सशक्त होगी, वे देश के लिए उतना ही अधिक योगदान दे सकेंगे।
उन्होंने एक युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “ज्ञान प्राप्त करने के लिए विदेश जाना गलत नहीं है, लेकिन उस ज्ञान का उपयोग भारत के हेतु होना चाहिए। देश की प्रगति और भविष्य को आकार देने में युवाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
भागवत ने कहा कि पिछले 100 वर्षों से कई लोग आरएसएस के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रहे हैं कि ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्रहित में हो।
उन्होंने कहा कि संघ न तो किसी के साथ प्रतिस्पर्धा करता है और न ही किसी का विरोध करता है, बल्कि उसका एकमात्र उद्देश्य एक सशक्त और सौहार्दपूर्ण समाज का निर्माण करना है।
आरएसएस प्रमुख ने युवाओं से इस सामूहिक प्रयास में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की।
यह युवा सम्मेलन आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों के तहत एमआईटी कॉलेज के ‘मंथन’ सभागार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर भागवत ने प्रतिभागियों से परिसंवाद किया और उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए।
भाषा खारी माधव
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