सुलतानपुर के एक अस्पताल में प्रसूता की संदिग्ध मौत, परिजनों का डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप

सुलतानपुर के एक अस्पताल में प्रसूता की संदिग्ध मौत, परिजनों का डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप

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  • Publish Date - January 16, 2026 / 06:38 PM IST,
    Updated On - January 16, 2026 / 06:38 PM IST

सुलतानपुर (उप्र), 16 जनवरी (भाषा) सुलतानपुर जिला महिला अस्पताल में एक महिला की प्रसव के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर परिजनों ने डॉक्टरों और कर्मचारियों पर गंभीर लापरवाही बरतने तथा बदसलूकी करने का आरोप लगाया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।

परिजनों का दावा है कि समय पर इलाज न मिलने के कारण उनकी बेटी की मौत हुई है। मृतका की मां उर्मिला पांडेय ने बताया कि उनकी बेटी अंशिका उपाध्याय (24) को बृहस्पतिवार को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

उर्मिला के अनुसार सब कुछ सामान्य था। शाम 6:24 बजे अंशिका ने बच्चे को जन्म दिया। बच्चा होने के बाद डॉक्टरों ने उसे वैसे ही छोड़ दिया। रात 9:30 बजे टांके लगाए गए और रात 10:30 बजे उसे अंदर ले जाया गया।

उर्मिला का कहना है कि अंशिका ने उन्हें बताया कि उसे बहुत ठंड लग रही है और वह कांप रही थी। परिजनों ने बार-बार डॉक्टरों को बुलाया, लेकिन वे सिर्फ रक्तचाप जांचकर चले जाते थे। शुक्रवार सुबह 4:30 बजे जब अंशिका की सांसें उखड़ने लगीं, तब डॉक्टरों ने उसे कहीं और ले जाने को कहा।

परिजनों ने सवाल उठाया कि यह बात पहले क्यों नहीं बताई गई।

परिजनों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने घटना का वीडियो बनाने की कोशिश की, तो महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों ने मोबाइल छीनने का प्रयास किया एवं मारपीट भी की।

उर्मिला पांडे ने यह भी बताया कि प्रशासन ने बिना उन्हें सूचित किए अंशिका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने न तो जहर खाया था और न ही उसे कोई बीमारी थी, यह पूरी तरह से डॉक्टरों की लापरवाही का मामला है।

जिला महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. आर के यादव ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

अंशिका पदारथपुर कादीपुर के पंकज उपाध्याय की पत्नी थी।

नगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक धीरज कुमार पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे और हंगामा कर रहे परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया।

भाषा सं आनन्द राजकुमार

राजकुमार