UCC Implementation in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को मिलेगी UCC कानून में छूट?.. सरकार के ऐलान के बाद कांग्रेस मुखर.. पूछ लिया ये बड़ा सवाल
UCC Implementation in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में यूसीसी लागू करने के फैसले पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, आदिवासी अधिकारों को लेकर चिंता

UCC Implementation in Chhattisgarh
- छत्तीसगढ़ में यूसीसी लागू करने की तैयारी तेज
- कांग्रेस ने आदिवासी अधिकारों को लेकर जताई चिंता
- सरकार ने समिति गठन की घोषणा की
रायपुर: पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान किया था कि, आने वाले दिनों प्रदेश में भी UCC यानी समान नागरिक संहिता कानून लागू किया जाएगा। डिप्टी सीएम अरुण साव ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया था कि, विधानसभा में इसका प्रस्ताव रखा जाएगा। (UCC Implementation in Chhattisgarh) इस कानून को लागू करने के किये कमेटी का गठन किया जाएगा। इस समिति की अध्यक्षता अगुवाई सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई करेंगी।
कांग्रेस ने शुरू किया विरोध?
वही सरकार के इस ऐलान पर कांग्रेस ने भी अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। मुख्य विपक्षी दल ने सरकार के मंशा पर भी सवाल खड़े है। पीसीसी के चीफ दीपक बैज ने पूछा है कि, UCC लागू होने से आदिवासियों का अधिकार कैसे सुरक्षित रहेगा? दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि, सरकार अपने फैसले से राष्ट्रपति के संरक्षण प्राप्त आदिवासियों के अधिकार छीनने का काम कर रही है। उन्होंने आशंका का जताते हुए कहा कि कही आदिवासियों की जल, जंगल और जमीन को उद्योगपतियों को सौंपने के लिए तो सरकार इसे लागू नहीं कर रही?
कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के अनुसार, UCC लागू होने से राज्य की 32% से अधिक जनजातीय आबादी, जो पाँचवीं अनुसूची और PESA अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित है, के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने साफ़ किया है कि, कांग्रेस इस कानून का विरोध करेगी। इससे पहले छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज (CSAS) भी इस कदम की आलोचना कर चुकी है।
क्यों उठ रहे है सवाल?
दरअसल पिछले साल उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) 27 जनवरी 2025 से आधिकारिक रूप से लागू किया गया था। इसके साथ ही उत्तराखंड यह कानून लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया था। इसके तहत विवाह, तलाक, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू किए गए हैं। (UCC Implementation in Chhattisgarh) राज्य में वैसे तो समान नागरिक संहिता (UCC) हिंदू, मुस्लिम समेत सभी धर्मों पर समान रूप से लागू किया गया है इसके बाजवूद संविधान के अनुच्छेद-342 में वर्णित अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी से बाहर रखा गया है। यानी कि इन पर यूसीसी के किसी तरह के प्रावधान लागू नहीं होंगे। इसके अलावा ट्रांसजेंडर समुदाय को भी इससे बाहर रखा गया है।
चूंकि यूसीसी पर चर्चा और बहस लम्बे समय से चल रही है लिहाजा पूर्व गृहमंत्री अमित शाह खुद यह स्पष्ट कर चुके हैं कि यूसीसी के प्रावधान अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होंगे। उन्हें अपने रीति-रिवाजों, संस्कृति को सहेजे रखने का पूरा अधिकार होगा। ऐसे में सवाल उठाना स्वाभाविक है कि, क्या आदिवासी बाहुल्य छत्तीसगढ़ में भी सरकार आदिवासियों को इस कानून के तहत राहत देगी?
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?
- विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति में सभी के लिए एक नियम।
- परिवार के सदस्यों के आपसी संबंध और अधिकारों में समानता।
- जाति, धर्म या परंपरा के आधार पर नियमों में कोई रियायत नहीं।
- किसी भी धर्म विशेष के लिए अलग से कोई नियम नहीं।
UCC हो लागू तो क्या होगा?
- UCC के तहत शादी, तलाक, संपत्ति, गोद लेने जैसे मामले।
- हर धर्म में शादी, तलाक के लिए एक ही कानून।
- जो कानून हिंदुओं के लिए, वहीं दूसरों के लिए भी।
- बिना तलाक के एक से ज्यादा शादी नहीं कर पाएंगे।
- शरीयत के मुताबिक जायदाद का बंटवारा नहीं होगा।
UCC लागू होने से क्या नहीं बदलेगा?
- धार्मिक रीति-रिवाज पर असर नहीं।
- ऐसा नहीं है कि शादी पंडित या मौलवी नहीं कराएंगे।
- खान-पान, पूजा-इबादत, वेश-भूषा पर प्रभाव नहीं।
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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः
उत्तर: सरकार समान कानून लागू कर सामाजिक समानता लाने का दावा कर रही है।
लेखक के बारे में
A journey of 10 years of extraordinary journalism.. a struggling experience, opportunity to work with big names like Dainik Bhaskar and Navbharat, priority given to public concerns, currently with IBC24 Raipur for three years, future journey unknown
और भी पढ़ें...Web Title: UCC in Chhattisgarh Sparks Debate, Congress Raises Concerns Over Tribal Rights and Government Intent
रायपुर
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