Aaj Ka Panchang 05th February 2026: आज भगवान गणपति की एक पूजा से दूर होंगे सारे विघ्न! द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर बन रहा है सुख-समृद्धि का योग, जानें शुभ मुहूर्त
Aaj Ka Panchang 05th February 2026: पंचांग के अनुसार आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।
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- आज द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी
- गणेश पूजा से विघ्न नाश
- चंद्र दर्शन के बाद पारण
नई दिल्ली: आज 5 फरवरी 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। पंचांग के अनुसार आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और साधक को सुख-समृद्धि व सफलता की प्राप्ति होती है।
Panchang 05th February: क्या कहता है आज का पंचांग ?
Aaj Ka Panchang 05th February 2026 के अनुसार, कृष्ण चतुर्थी तिथि 6 फरवरी रात्रि 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। आज सुकर्मा योग का संयोग बन रहा है, जो 6 फरवरी रात्रि 12 बजकर 04 मिनट तक प्रभावी रहेगा। वहीं, बव करण दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक और इसके बाद बालव करण 6 फरवरी की रात 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। आज का संवत् 2082 है।
Panchang 05th February 2026: सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रमा की स्थिति
आज सूर्योदय प्रातः 07 बजकर 07 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 06 बजकर 03 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय रात्रि 09 बजकर 35 मिनट पर तथा चंद्रास्त प्रातः 09 बजकर 05 मिनट पर होगा। आज सूर्यदेव मकर राशि में और चंद्रदेव कन्या राशि में विराजमान रहेंगे।
Aaj Ka Panchang: आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त
आज अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 से 12:57 बजे तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए उत्तम माना जाता है। वहीं अमृत काल दोपहर 03:32 से सायं 05:11 बजे तक रहेगा। अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 01:57 से 03:19 बजे तक, गुलिकाल प्रातः 09:51 से 11:13 बजे तक और यमगण्ड प्रातः 07:07 से 08:29 बजे तक रहेगा। इन समयों में शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।
Aaj Ka Panchang Dikhao: आज का नक्षत्र.
आज चंद्रदेव उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जो रात्रि 10 बजकर 57 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इस नक्षत्र के जातक विनम्र, मेहनती, बुद्धिमान और मददगार स्वभाव के माने जाते हैं। इस नक्षत्र के स्वामी सूर्यदेव हैं और देवता आर्यमन माने गए हैं, जो मित्रता और सामाजिक सौहार्द के प्रतीक हैं।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश का प्रिय व्रत माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। व्रती दिनभर उपवास रखकर संध्या के समय चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करते हैं। भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प अर्पित करने से बुद्धि, विवेक और सौभाग्य में वृद्धि मानी जाती है।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर क्या करें
इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। दिनभर उपवास या फलाहार करें। संध्या समय चंद्र दर्शन कर अर्घ्य दें और गणेश मंत्र या व्रत कथा का पाठ करें। चंद्र दर्शन के पश्चात व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है।

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