Aaj Ka Panchang 13 April 2026: आज वरूथिनि एकादशी पर बन रहे दुर्लभ योग! क्या आप जानते हैं इस व्रत से मिल सकता है वर्षों की तपस्या जितना फल? पढ़िए आज का पंचांग
Aaj Ka Panchang 13 April 2026: आज वरूथिनि एकादशी पर बन रहे दुर्लभ योग! क्या आप जानते हैं इस व्रत से मिल सकता है वर्षों की तपस्या जितना फल? पढ़िए आज का पंचांग
panchang aaj ka/ image source: ibc24
Aaj Ka Panchang 13 April 2026: रायपुर: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है और उसे पुण्य फल की प्राप्ति होती है। वरूथिनि एकादशी का व्रत सौभाग्य, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि यह व्रत कन्यादान और वर्षों की तपस्या के समान फल देने वाला होता है।
Aaj Ka Panchang: क्या कहता है आज का पंचांग
पंचांग के अनुसार, तिथि की बात करें तो कृष्ण एकादशी तिथि 14 अप्रैल को रात्रि 01 बजकर 08 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। योग की स्थिति में ‘शु’ योग सायं 05 बजकर 17 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद शुक्ल योग का प्रभाव शुरू होगा। करण में बव करण दोपहर 01 बजकर 18 मिनट तक रहेगा, जबकि इसके बाद बालव करण रात्रि 01 बजकर 08 मिनट (14 अप्रैल) तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान कई शुभ और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर योगों का निर्माण भी देखा जा रहा है।
सूर्योदय का समय प्रातः 05 बजकर 58 मिनट और सूर्यास्त का समय सायं 06 बजकर 46 मिनट निर्धारित है। वहीं चंद्रोदय रात्रि 03 बजकर 53 मिनट पर (14 अप्रैल) और चंद्रास्त दोपहर 02 बजकर 33 मिनट पर होगा। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार सूर्य देव मीन राशि में और चंद्र देव कुंभ राशि में विराजमान हैं।
Panchang 13 April 2026: ये हैं आज के शुभ-अशुभ मुहूर्त
आज के शुभ मुहूर्त में अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। वहीं अशुभ काल में राहुकाल प्रातः 07 बजकर 34 मिनट से 09 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त गुलिक काल दोपहर 01 बजकर 58 मिनट से 03 बजकर 34 मिनट तक और यमगण्ड प्रातः 10 बजकर 46 मिनट से 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।
नक्षत्र की बात करें तो आज चंद्रमा धनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र में संचरण करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन व्रत, पूजा और ध्यान के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। वरूथिनि एकादशी का व्रत करने वाले श्रद्धालु अगले दिन पारण कर व्रत का समापन करते हैं, जिससे उन्हें श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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