Badrinath Dham ke Rahasya: आखिर बद्रीनाथ धाम में कुत्ते भौंकते क्यों नहीं हैं और न ही बारिश होने पर आकाशीय बिजली कड़कती है? जान लीजिये रहस्य..

Why don't dogs bark in Badrinath Dham, and why doesn't lightning strike during rain? Know the mystery..

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  • Publish Date - September 9, 2025 / 07:13 PM IST,
    Updated On - September 23, 2025 / 04:51 PM IST

Badrinath dham ke Rahasya

Badrinath Dham ke Rahasya: बद्रीनाथ धाम अथवा बद्रीनारायण मन्दिर भारतीय राज्य उत्तराखण्ड के चमोली जनपद में अलकनन्दा नदी के तट पर स्थित एक हिन्दू मन्दिर है। यह हिंदू देवता विष्णु को समर्पित मंदिर है बद्रीनाथ मन्दिर में हिंदू धर्म के देवता विष्णु के एक रूप “बद्रीनारायण” की पूजा होती है। चार धामों में से एक धाम बद्रीनाथ मंदिर किसी चमत्कार और रहस्य से कम नहीं है। यहाँ भगवान विष्णु ध्यान मुद्रा में विराजमान हैं।

उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे ब्रदीनाथ धाम स्थित है। यह भारत के सबसे पवित्र और चार धामों, में से यह एक प्राचीन मंदिर है। बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु निवास करते हैं। माना जाता है कि भगवान विष्णु ने यहां बदरी वृक्ष के नीचे तपस्या की थी, इसलिए इस जगह का नाम बद्रीनाथ पड़ा। भगवान विष्णु के नर-नारायण स्वरूप का यह धाम कई चमत्कारों का केंद्र है, जैसे कुत्तों का न भौंकना, बिजली का न कड़कना, और सबसे आश्चर्यजनक – सांप और बिच्छुओं में जहर का प्रभावहीन होना। आईये जानते हैं इस मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य के बारे में..

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Badrinath Dham ke Rahasya: जानकर हो जाएंगे हैरान

आपको जानकार हैरानी होगी कि बद्रीनाथ धाम में कोई भी कुत्ता भौंकता नजर नहीं आता है। और तो और केवल कुत्ता ही नहीं, बल्कि आकशीय बिजली चमकेगी लेकिन कड़केगी नहीं, बादल बरसेगा लेकिन गर्जेगा का नहीं और इसके पीछे का रहस्य काफी ज्यादा रोचक है।
बद्रीनाथ मंदिर समुद्रतल से करीब 3 हजार मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर की वास्तुकला नागर शैली पर आधारित है। गर्भगृह के अंदर भगवान विष्णु की शालिग्राम शिला से बनी काली पत्थर की मूर्ति विराजमान है, जिसे बद्रीनाथ कहा जाता है। मूर्ति पद्मासन में है और चार भुजाओं वाले विष्णु के रूप को दर्शाती है।

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Badrinath Dham ke Rahasya: पौराणिक कथा

दरअसल धार्मिक मान्यता है कि बद्रीनाथ धाम में कुत्ते नहीं भौंकते हैं, जिसके पीछे यह पौराणिक कथा है कि बद्रीनाथ को भगवान विष्णु का वैकुंठ माना जाता है, जहां नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं कर सकतीं। कुत्तों को यम का दूत माना जाता है, और उनकी भौंकने की आवाज नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक हो सकती है। माना जाता है कि भगवान बद्रीनाथ की कृपा से कुत्तों की आवाज दब जाती है, जिससे धाम की शांति बनी रहती है। तो कुछ लोगों का ये मानना हैं कि बद्रीनाथ में मौजूद कुत्ते भगवान विष्णु के सेवक हैं और उन्होंने अपनी प्रभु की तपस्या में विघ्न न डालने का वचन दिया हुआ है। प्राकृतिक से लेकर जानवर हर कोई उनकी तपस्या में साथ दे रहा है।

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धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु ने स्वयं उन्हें ऐसा आशीर्वाद दिया था ताकि उनके भक्त सुरक्षित रहें और उनका तप भंग न हो। कुछ मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थान का प्राकृतिक वातावरण भी ऐसा है कि यहां के जीव-जंतुओं में विष नहीं होता। भगवान विष्णु ने बद्रीनाथ में नारायण के रूप में अवतार लिया था और उन्हें यहां तपस्या करते समय सांपों और बिच्छुओं को यह वरदान दिया था कि वे भक्तों को कभी नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। कई यात्री और स्थानीय लोग बताते हैं कि सांप और बिच्छू दिखाई तो देते हैं, लेकिन कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते। बद्रीनाथ धाम एक अत्यंत पवित्र स्थान है, और इसके प्राकृतिक वातावरण में ऐसा संतुलन है जिसके कारण यहां के सांप और बिच्छू विषहीन हो जाते हैं।