Chaitra Navratri 2026 Day 8: चैत्र नवरात्रि का 8वां दिन आज, मां महागौरी की पूजा से मिलेगी सुख-समृद्धि, जानें शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र

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Chaitra Navratri 2026 Day 8: रायपुर: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और आज इसका आठवां दिन, यानी दुर्गा अष्टमी, अत्यंत विशेष माना जा रहा है।

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  • Publish Date - March 26, 2026 / 07:15 AM IST,
    Updated On - March 26, 2026 / 07:17 AM IST

mahagauri/ image source: IBC24

HIGHLIGHTS
  • मां महागौरी पूजा का पावन दिन
  • अष्टमी पर विशेष शुभ योग संयोग
  • कन्या पूजन का महत्वपूर्ण अवसर आज

Chaitra Navratri 2026 Day 8: रायपुर: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और आज इसका आठवां दिन, यानी दुर्गा अष्टमी, अत्यंत विशेष माना जा रहा है। यह दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होकर नवमी तिथि तक चलने वाला यह पर्व भक्तों के लिए आस्था, साधना और आत्मशुद्धि का प्रतीक होता है। अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा करने से जीवन में शांति, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Maa Mahagauri Puja Vidhi: मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और कल्याणकारी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और कल्याणकारी है। उन्हें सफेद वस्त्र, श्वेत आभूषण और उज्ज्वल आभा के साथ दर्शाया जाता है, जो शुद्धता और निर्मलता का प्रतीक है। कहा जाता है कि जो भक्त विधि-विधान से मां की पूजा करते हैं, उनके सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है, जिससे अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की प्राप्ति होती है।

Durga Ashtami 2026 date and time: जानें आज के शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र

आज मां महागौरी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6:50 बजे से 8:21 बजे तक रहेगा। इसके अलावा शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 6:18 से 7:50 बजे तक और लाभ-उन्नति मुहूर्त दोपहर 12:27 से 1:59 बजे तक रहेगा। इस दिन शोभन योग पूरे दिन प्रभावी रहेगा, जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग शाम 4:19 बजे से अगले दिन सुबह तक बनेंगे। ये सभी योग पूजा-पाठ और विशेष अनुष्ठान के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं।

पूजा विधि की बात करें तो सबसे पहले पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए। इसके बाद चौकी पर माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। साथ ही श्रीगणेश, नवग्रह और अन्य देवियों का आह्वान कर विधिवत पूजा करें। मां को विशेष रूप से सुगंधित पुष्प अर्पित किए जाते हैं, जिनमें रात की रानी के फूल प्रिय माने जाते हैं। पूजा के दौरान दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है।

भोग के रूप में मां महागौरी को नारियल अर्पित करना चाहिए, जो उन्हें अत्यंत प्रिय है। सफेद रंग की मिठाइयां और वस्त्र भी चढ़ाए जाते हैं, जो शुद्धता और सात्विकता का प्रतीक हैं। भक्त “ॐ देवी महागौर्यै नमः” बीज मंत्र का जाप कर मां की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही ध्यान और स्तुति मंत्रों का उच्चारण करने से मन को शांति और आध्यात्मिक शक्ति मिलती है।

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