Ganesh Chaturthi 2026: क्या आज चांद देखने से लगेगा कलंक दोष? आखिर चतुर्थी का चांद क्यों नहीं देखते और क्या है इसका रहस्य?

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Ganesh Chaturthi 2026: 15 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी समाप्त होने के बाद चंद्र दर्शन को लेकर लोगों में उत्सुकता रहती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चतुर्थी के दौरान चंद्रमा देखने से कलंक दोष लग सकता है। ऐसे में आज चतुर्थी तिथि समाप्त होने के बाद चंद्र दर्शन को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन बनी हुई है।

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  • Publish Date - September 15, 2026 / 03:04 PM IST,
    Updated On - September 15, 2026 / 03:12 PM IST

(Ganesh Chaturthi 2026/ Image Credit: AI-generated)

HIGHLIGHTS
  • 15 सितंबर को चांद देख सकते हैं
  • सुबह 7:44 बजे चतुर्थी समाप्त
  • इसके बाद शुरू हुई पंचमी तिथि

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से जुड़ी धार्मिक मान्यता के कारण सोमवार शाम कई लोगों ने आसमान की ओर देखने से परहेज किया। अब 15 सितंबर 2026 को सबसे बड़ा सवाल है कि क्या आज चांद देखा जा सकता है? पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी 14 सितंबर सुबह करीब 7:07 बजे शुरू हुई और 15 सितंबर की सुबह 7:44 बजे समाप्त हो गई। इसके बाद पंचमी तिथि लग चुकी है। इसलिए आज शाम दिखाई देने वाला चंद्रमा चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2026) का नहीं बल्कि पंचमी तिथि का होगा और धार्मिक मान्यता के अनुसार आज चंद्र दर्शन किया जा सकता है।

गणेशोत्सव जारी लेकिन चंद्र दर्शन की मनाही नहीं

गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव को एक ही समझना सही नहीं है। चतुर्थी वह विशेष तिथि है, जिस दिन भगवान गणेश की स्थापना की जाती है, जबकि गणेशोत्सव 11 दिनों तक चलता है। घरों और पंडालों में विराजमान गणपति का विसर्जन परंपरा के अनुसार अलग-अलग दिनों में किया जाता है। कई लोग डेढ़, तीन, पांच, सात या दस दिन बाद विसर्जन करते हैं। मुख्य विसर्जन अनंत चतुर्दशी यानी 25 सितंबर को होगा। लेकिन गणपति के घर में विराजमान रहने तक चांद देखने पर रोक नहीं होती। चंद्र दर्शन (Ganesh Chaturthi 2026) से जुड़ी मान्यता खास तौर पर भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से है।

चतुर्थी के चांद को क्यों माना जाता है वर्जित?

धार्मिक कथा के अनुसार चंद्रदेव ने भगवान गणेश के स्वरूप को देखकर उनका उपहास किया था। इससे नाराज होकर गणेशजी ने उन्हें शाप दिया कि चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखने वाले व्यक्ति पर झूठा आरोप या कलंक का सामना करना पड़ेगा। बाद में चंद्रदेव के क्षमा मांगने पर शाप को चतुर्थी तिथि तक सीमित कर दिया गया। इसी वजह से इस दिन को कलंक चतुर्थी भी कहा जाता है। श्रीकृष्ण और स्यमंतक मणि से जुड़ी कथा भी इसी मान्यता से जुड़ी है। कथा में श्रीकृष्ण पर मणि चुराने का झूठा आरोप लगा था, परंतु बाद में उन्होंने सत्य सामने लाकर स्वयं को निर्दोष साबित किया था।

अगर गलती से चांद देख लिया तो क्या करें?

अगर किसी व्यक्ति ने 14 सितंबर को अनजाने में चंद्रमा (Ganesh Chaturthi 2026) देख लिया हो तो घबराने की जरूरत नहीं है। धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश का स्मरण करने, गणेश चतुर्थी की कथा या स्यमंतक मणि का प्रसंग पढ़ने और गणेश मंत्र का जाप करने की बात कही गई है। इसे धार्मिक उपाय माना जाता है, किसी अनिष्ट की निश्चित भविष्यवाणी नहीं। 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे चतुर्थी समाप्त होने के साथ उससे जुड़ी चंद्र दर्शन की मनाही भी समाप्त हो गई। इसलिए आज शाम चंद्रमा देखा जा सकता है।

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क्या 15 सितंबर 2026 को चांद देख सकते हैं?

हां, 15 सितंबर की शाम चांद देखा जा सकता है, क्योंकि चतुर्थी तिथि सुबह 7:44 बजे समाप्त हो चुकी है।

चतुर्थी तिथि कब समाप्त हुई?

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी 15 सितंबर 2026 को सुबह करीब 7:44 बजे समाप्त हुई और इसके बाद पंचमी तिथि शुरू हो गई।

क्या पूरे गणेशोत्सव में चांद देखना मना है?

नहीं, चंद्र दर्शन की धार्मिक मान्यता विशेष रूप से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से जुड़ी है, पूरे गणेशोत्सव से नहीं।

चतुर्थी का चांद देखने से क्या मान्यता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर झूठा आरोप या कलंक लग सकता है। इसे कलंक दोष से जोड़ा जाता है।