Publish Date - August 30, 2022 / 09:22 AM IST,
Updated On - November 29, 2022 / 08:50 PM IST
हरितालिका तीज 2022 : धर्म। हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की तृतीया को होता है। धर्म शास्त्रियों के अनुसार चतुर्थी तिथि से युक्त तृतीया तिथि वैधव्यदोष का नाश करती है और यह पुत्र-पौत्रादि को बढ़ाने वाली होती है। इस दिन कुमारी और सौभाग्यवती महिला गौरी-शंकर की पूजा करती है। छत्तीसगढ़ मे हरतालिका तीज का विशेष महत्व है। राज्य में इसे तीजा कहा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। प्रदेश में महिलाए व्रत के लिए मायके जाती हैं। हरितालिका तीज इसे निर्जला रखा जाना चाहिए, अर्थात पानी भी नहीं पीना चाहिए।>>*IBC24 News Channel केWHATSAPP ग्रुप से जुड़ने के लिएयहां CLICK करें*<<
क्योंकि दूज के दिन यहां महिलाएं कड़ु-भात (करेले की सब्जी और भात) खाने की परंपरा का पालन करती है साथ में इस मौके पर बने स्थानीय पकवान भी फिर रात्रि बारह बजे के बाद से निर्जला व्रत शुरु जो कि अगली रात बारह बजे तक चलता है। तीजा के दिन मायके से मिले कपड़े पहनकर जहां कहीं भी आस-पड़ोस में कथा बांचकर पूजा की जाती है। महिलाएं कथा सुनकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। इसके बाद दूसरे दिन अर्थात चतुर्थी को ही भोजन ग्रहण होता है। हरितालिका तीज का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त , 2022 सुबह 05:46 से 08:17 तक।
सुहाग और सौभाग्य का पर्व है ‘हरतालिका तीज’, हरतालिका तीज को हरितालिका तीज भी कहते हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का है विधान। लड़कियां और सौभाग्यवती महिलाएं करती हैं व्रत, व्रत करने से मनोवांछित वर की होती है प्राप्ति। व्रत करने वाली सुहागिनों के सौभाग्य की रक्षा स्वयं महादेव करते हैं। हरतालिका तीज पूजन प्रदोष काल में किया जाता है। हरतालिका तीज को बूढ़ी तीज भी कहा जाता है। हरतालिका तीज के दिन सास अपनी बहू को सुहाग का सिंधारा देती हैं। व्रत करने से दांपत्य जीवन में खुशी बरकरार रहती है। हरतालिका तीज के दिन सुहागिनों को लाल वस्त्र पहनना चाहिए। महिलाओं का हाथों में मेहंदी लगाना शुभ होता है। शिव-पार्वती के पूजन से दूर होते हैं जीवन के कष्ट।