Kottankulangara Temple: यहां पुरुष बनते हैं दुल्हन! साड़ी-मेकअप के बिना मंदिर में नहीं मिलती एंट्री, वजह जानकर चौंक जाएंगे

Kottankulangara Temple: केरल के कोट्टनकुलंगारा देवी मंदिर में सदियों पुरानी अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहां पुरुण श्रद्धालु साड़ी, गहने, मेकअप और गजरा पहनकर महिलाओं की तरह श्रृंगार करते हैं। मान्यता है कि इस रूप में देवी दर्शन और पूजा करने से उनकी विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Kottankulangara Temple: यहां पुरुष बनते हैं दुल्हन! साड़ी-मेकअप के बिना मंदिर में नहीं मिलती एंट्री, वजह जानकर चौंक जाएंगे

(Kottankulangara Temple/ Image Credit: IBC24 News)

Modified Date: August 7, 2026 / 03:39 pm IST
Published Date: August 7, 2026 3:22 pm IST
HIGHLIGHTS
  • केरल का कोट्टनकुलंगारा देवी मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
  • यहां पुरुष श्रद्धालु साड़ी और महिलाओं का श्रृंगार करके ही मंदिर में प्रवेश करते हैं।
  • हर साल चमायविलक्कू उत्सव में हजारों भक्त इस परंपरा का पालन करते हैं।

केरल: Kottankulangara Temple: भारत के अलग-अलग मंदिर अपनी खास परंपराओं और मान्यताओं के लिए जाने जाते हैं। इन्हीं में केरल का कोट्टनकुलंगारा देवी मंदिर (Kottankulangara Temple) भी शामिल है जो अनूठी धार्मिक परंपरा के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। यहां देवी के दर्शन करने के लिए आने वाले पुरुष श्रद्धालु सामान्य कपड़ों में प्रवेश नही करते। उन्हें साड़ी पहनकर, महिलाओं की तरह श्रृंगार करके ही मंदिर में जाने की अनुमति मिलती है। वर्षों से चली आ रही परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जाती है।

चमायविलक्कू उत्सव में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

मंदिर में हर साल चमायविलक्कू उत्सव (Chamayavilakku Festival) बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान केरल ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर की परंपरा के अनुसार पुरुष पैंट, शर्ट या अन्य सामान्य पुरुष परिधान पहनकर देवी के दर्शन नहीं कर सकते। सभी श्रद्धालु साड़ी धारण करते हैं और पारंपरिक तरीके से सजकर देवी की पूजा-अर्चना करते हैं। यह आयोजन मंदिर की सबसे खास पहचान माना जाता है।

साड़ी, मेकअप और गजरे के साथ होता है पूरा श्रृंगार

देवी के दर्शन से पहले पुरुष श्रद्धालु महिलाओं की तरह (Kottankulangara Temple) पूरा श्रृंगार करते हैं। वे साड़ी पहनते हैं, हाथों में चूड़ियां धारण करते हैं, चेहरे पर मेकअप करते हैं और बालों में गजरा भी लगाते हैं। कई लोग पारंपरिक आभूषण भी पहनते हैं। उत्सव के दौरान मंदिर के बाहर अस्थायी मेकअप स्टॉल और ब्यूटी पार्लर लगाए जाते हैं, जहां मेकअप आर्टिस्ट श्रद्धालुओं को तैयार करने में मदद करते हैं। इसके बाद सभी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ मंदिर में प्रवेश करते हैं।

इस परंपरा के पीछे जुड़ी है खास मान्यता

स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, बहुत समय पहले कुछ चरवाहे लड़के लड़कियों का वेश धारण कर देवी की पूजा किया करते थे। उनकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें दर्शन दिए और आशीर्वाद प्रदान किया। तभी से यह मान्यता प्रचलित हुई कि स्त्री रूप धारण करके देवी की आराधना करना विशेष फलदायी होता है। इसी विश्वास के कारण यह परंपरा आज भी बिना किसी बदलाव के निभाई जा रही है।

मनोकामना पूरी होने का विश्वास

मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन और पूरी श्रद्धा से इस परंपरा का पालन (Kottankulangara Temple) करने पर देवी उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। कई लोग नौकरी, विवाह, संतान, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख की कामना लेकर यहां आते हैं। यही अटूट आस्था हर साल हजारों भक्तों को इस अनोखे मंदिर तक खींच लाती है। भक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का यह अनूठा संगम आज भी केरल की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

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लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।