Krishna Janmashtami 2026: फिर लौट आया द्वापर युग! इस जन्माष्टमी बन रहा हूबहू वही दुर्लभ महासंयोग.. रातों-रात पलटेगी इन 4 राशियों की किस्मत

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Krishna Janmashtami 2026: क्या आप जानते हैं 4 सितंबर 2026 को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी पर बनने जा रहा है द्वापर युग जैसा ऐतिहासिक महासंयोग? इस जन्माष्टमी चंद्रमा के वृषभ राशि में उच्च होने और रोहिणी नक्षत्र के महासंयोग से इन 4 राशियों के खुलेंगे भाग्य! आइये जानें, क्या आपकी राशि भी है इसमें शामिल..

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  • Publish Date - September 2, 2026 / 06:30 PM IST,
    Updated On - September 2, 2026 / 06:34 PM IST

Krishna Janmashtami 2026/Image Credit: ScreenGrab / AI Generated / @Grok

HIGHLIGHTS
  • जानें क्यों इस जन्माष्टमी का हर पल है महा-यज्ञ के समान?
  • इन 4 राशियों का शुरू होने जा रहा है स्वर्णिम काल!

Krishna Janmashtami 2026: “श्रीकृष्ण जन्माष्टमी यानी हमारे प्यारे कान्हा का जन्मोत्सव! इस बार 4 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाने वाली ‘कृष्ण जन्माष्टमी 2026 बेहद ख़ास होने वाली है। शास्त्रों के अनुसार, द्वापर युग में श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि महारात्रि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि के चंद्रमा के शुभ लग्न में हुआ था।

इस जन्माष्टमी पर भी एक ऐसा दुर्लभ और ऐतिहासिक महासंयोग बनने वाला है, जब ग्रहों की स्थिति हूबहू वैसी ही होगी जैसी द्वापर युग में कान्हा के जन्म के समय थी। पंचांग के अनुसार, मध्यरात्रि में चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करेंगे और रोहिणी नक्षत्र का दिव्य प्रभाव रहेगा। इसके साथ ही इस पावन अवसर पर ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ और ‘हर्षण योग’ का अद्भुत मिलन हो रहा है।

ज्योतिष में ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ को समस्त कामनाओं की सिद्धि करने वाला और ‘हर्षण योग’ को जीवन में हर्ष व समृद्धि लाने वाला माना गया है। इस शुभ घड़ी में की गई लिया गया संकल्प अनंत गुना फलदायी सिद्ध होता है। आइये जानते हैं कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहे इन दिव्य संयोगों से किन 4 लक्की राशियों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ..

Rashifal: इन 4 भाग्यशाली राशियों के लिए खुलेंगे अटूट धन-संपदा के गुप्त द्वार!

वृषभ राशि (Taurus)

वृषभ राशि वालों के लिए यह जन्माष्टमी बहुत बड़ी खुशखबरी लेकर आ रही है। इस पावन अवसर पर चन्द्रमा आपकी ही की राशि में उच्च के होकर विराजेंगे और रोहिणी नक्षत्र का मेल आपके लिए एक वरदान जैसा होगा। इसके प्रभाव से वृषभ राशि के जातकों की किस्मत चमक उठेगी और आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी। लम्बे समय से अटके हुए कार्य जल्द पूर्ण होंगे। धन आगमन के नए रास्ते खुलेंगे, आर्थिक स्थिति मज़बूत होगी और आपका आत्मविश्वास आसमान की ऊँचाइयाँ छुएगा।

सिंह राशि (Leo)

इस जन्माष्टमी पर बन रहा ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ और ‘हर्षण योग’ सिंह राशि के जातकों के लिए भाग्य बदलने वाला साबित होगा। समाज में आपकी मान-प्रतिष्ठ बढ़ेगी। नेतृत्व वाली जगहों पर प्रमोशन और नई ज़िम्मेदारी या कोई बड़ा अवसर जल्द मिल सकता है। पैतृक संपत्ति या अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। कोर्ट-कचहरी के मामले या पुराने विवादों में आपके पक्ष में समाधान होने की पूरी संभावना है।

वृश्चक राशि (Scorpio)

वृश्चक राशि के जातकों के लिए जन्माष्टमी का यह पर्व अत्यंत फलदायी रहने वाला है, चंद्रमा की स्थिति आपके वैवाहिक जीवन और साझेदारी के कामों में बड़ी सफलता दिलाएगी। आपकी राशि में स्वामी ‘मंगल’ अपनी स्वराशि में शक्तिशाली स्थिति में है, जिनकी वजह से आपके जीवन में अचानक परिवर्तन, नई-नई संभावनाएं और तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे। पुराने निवेश या पुराने समय से अटके हुए काम जल्दी पूरे होंगे। कारोबार में बड़े सौदे या दोगुना मुनाफा होने की उम्मीद है।

मकर (Capricorn)

इस जन्माष्टमी पर बन रहा ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ और ‘रोहिणी नक्षत्र’ का दुर्लभ महासंयोग मकर राशि के जातकों के लिए तरक्की के नए द्वार खोलने जा रहा है। मकर राशि के स्वामी ‘शनि देव’ अपनी स्वराशि में विराजमान हैं इस महासंयोग में उनका साथ जुड़ना आपके भाग्य को चमकाने वाला साबित होगा। मकर राशि के लोग मेहनत और ऊंचे पद के लिए जाने जाते हैं, और इस महासंयोग से आपके करियर और पैसों के मामले में आपको बड़ी तरक्की हासिल होगी। आपकी किस्मत चमक उठेगी और काम में मजबूती आएगी।

Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

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साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी और व्रत का सही दिन कौन सा है?

ज्योतिष और पंचांग गणना के अनुसार, इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व 4 सितंबर 2026, दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। गृहस्थ जीवन वाले और वैष्णव संप्रदाय के लोग इसी दिन व्रत रखेंगे और मध्यरात्रि को कान्हा का जन्मोत्सव मनाएंगे।

इस जन्माष्टमी पर बनने वाले 'द्वापर युग जैसे दुर्लभ महासंयोग' का क्या मतलब है?

शास्त्रों के अनुसार, जब द्वापर युग में भगवान कृष्ण का अवतार हुआ था, तब भाद्रपद अष्टमी की महारात्रि थी, रोहिणी नक्षत्र था और चंद्रमा वृषभ राशि में उच्च के थे। इस साल 4 सितंबर 2026 की रात ठीक 12 बजे हूबहू यही तीनों दुर्लभ स्थितियां एक साथ दोबारा बन रही हैं, जिसे ज्योतिष में एक ऐतिहासिक महासंयोग माना जा रहा है।

'सर्वार्थ सिद्धि योग' और 'हर्षण योग' में पूजा करने से क्या फल मिलता है?

'सर्वार्थ सिद्धि योग' को सभी प्रकार के अटके हुए कामों को सफल करने और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना गया है। वहीं 'हर्षण योग' जीवन में सुख, समृद्धि और अपार खुशियाँ लेकर आता है। इस महामुहूर्त में लड्डू गोपाल की पूजा या कोई भी नया संकल्प लेने से उसका फल कई गुना तेज़ी से मिलता है।

इस महासंयोग से किन 4 राशियों की किस्मत रातों-रात चमकने वाली है?

इस ऐतिहासिक ग्रह-दशा का सबसे शुभ और शक्तिशाली प्रभाव वृषभ (Taurus), सिंह (Leo), वृश्चिक (Scorpio) और मकर (Capricorn) राशि के जातकों पर पड़ेगा। इन राशियों के लिए मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि, नौकरी में प्रमोशन, व्यापार में दोगुना मुनाफा और अचानक धन लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं।

इस दिव्य संयोग का लाभ उठाने के लिए जन्माष्टमी की रात 12 बजे क्या करना चाहिए?

इस अलौकिक रात ठीक 12 बजे शंख और घंटी बजाकर कान्हा का पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल) से अभिषेक करें। उन्हें पीले वस्त्र और पीला चंदन अर्पित करें। इस महामुहूर्त में अपनी तिजोरी के पास दीपक जलाकर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।