ठाणे, दो सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र में ठाणे की एक अदालत ने महाराष्ट्र सुरक्षा बल (एमएसएफ) के 34 वर्षीय कांस्टेबल को दुष्कर्म, जबरन गर्भपात और धोखाधड़ी के मामले में बरी कर दिया है। यह मामला 2020 में उसकी एक महिला सहकर्मी ने दर्ज कराया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी.टी. पवार ने 28 अगस्त को दिए गए एक आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी का अपराध बिना किसी संदेह के साबित करने में विफल रहा।
अदालत ने शिकायतकर्ता के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभासों का जिक्र किया और यह पाया कि शारीरिक संबंध आपसी सहमति से बने थे, न कि शादी के झूठे वादे के आधार पर।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता और आरोपी दोनों घाटकोपर रेलवे स्टेशन पर एमएसएफ के कांस्टेबल के तौर पर तैनात थे और 2018 में उनके बीच प्रेम संबंध बने थे।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि जाधव ने शादी का झूठा वादा करके बार-बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती हो गई और कथित तौर पर उसकी सहमति के बिना उसका गर्भपात करा दिया गया।
महिला को जब पता चला कि जाधव ने किसी दूसरी महिला से शादी कर ली है, तो उसने चार मार्च, 2020 को मुंब्रा पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 376 (दुष्कर्म), 313 (महिला की सहमति के बिना गर्भपात कराना), 420 (धोखाधड़ी) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत शिकायत दर्ज कराई।
अदालत ने कहा, ‘‘शिकायतकर्ता के बयान से यह साफ तौर पर साबित होता है कि आरोपी उससे शादी करना चाहता था और वह उससे शादी करने से इनकार कर रही थी।’’
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से पता चलता है कि आरोपी और पीड़िता के बीच डेढ़ साल से अधिक समय से रिश्ता चला था।
अदालत ने कहा, ‘‘अगर पीड़िता को इस बात की कोई शिकायत थी कि आरोपी उसकी मर्जी के बिना शारीरिक संबंध बना रहा था, तो उसे बहुत पहले ही जांच एजेंसी से संपर्क करना चाहिए था, खासकर तब जब उसे पता चला कि आरोपी ने शादी करने से इनकार कर दिया है। लेकिन आरोपी की शादी किसी दूसरी लड़की से तय होने की बात जानने के बाद भी वह उसके साथ शारीरिक संबंध बनाती रही, जिससे यह शक पैदा होता है कि यह बिना सहमति के बनाया गया या शादी के बहाने बनाया गया संबंध था या नहीं।’’
अदालत ने कहा कि जनवरी 2020 में शिकायत के आधार पर दर्ज किए गए गैर-संज्ञेय अपराध के मामले में, उसने दुष्कर्म का आरोप नहीं लगाया था, बल्कि केवल दुर्व्यवहार और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए थे।
इसके आधार पर अदालत ने कहा कि पीड़िता के बयान विरोधाभासी हैं।
भाषा संतोष माधव
माधव