Eclipse Astrology 2026: ग्रहण क्या सच में बदल देता है भाग्य और किसे होता है अशुभ प्रभाव? जानें ज्योतिष शास्त्र की गहरी बातें जो आपको हैरान कर देगी

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Eclipse Astrology 2026: ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से ग्रहण को विशेष महत्व दिया जाता है। कुछ लोग इसे अशुभ मानते हैं, जबकि विद्वान इसे प्राकृतिक खगोलीय घटना बताते हैं। इस साल 2026 में सूर्य और चंद्र ग्रहण होंगे, जिन्हें लेकर लोगों में कई सवाल है। यह ग्रहण हमारे जीवन और ज्योतिषीय प्रभाव से जुड़े हैं।

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  • Publish Date - February 12, 2026 / 01:14 PM IST,
    Updated On - February 12, 2026 / 01:14 PM IST

(Eclipse Astrology 2026/ Image Credit: Pexels)

HIGHLIGHTS
  • ग्रहण खगोल विज्ञान में अद्भुत घटना, ज्योतिष में संवेदनशील समय।
  • सूर्य ग्रहण से 12 घंटे और चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लागू होता है।
  • 17 फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

नई दिल्ली: Eclipse Astrology Effects ग्रहण खगोल विज्ञान के लिए एक अद्भुत खगोलीय घटना है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसे विशेष महत्व और संवेदनशील माना जाता है। जब सूर्य या चंद्रमा पर ग्रहण लगता है, तो लोगों के मन में एक ही सवाल उठता है कि क्या यह वास्तव में अशुभ प्रभाव डालेगा? साल 2026 में भी कई ग्रहण लगने वाले हैं, जिन्हें लेकर लोगों में जिज्ञासा और चिंता दोनों हैं।

ग्रहण और ज्योतिष (Eclipse and Astrology)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के दौरान ब्रह्मांड में ऊर्जा का संतुलन बदल जाता है। इसे अशुभ मानने का मुख्य कारण सूतक काल है। सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लागू होता है। इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती मानी जाती है, इसलिए शुभ कार्य रोक दिए जाते हैं।

राशियों पर प्रभाव (Effect on Zodiac Signs)

ज्योतिषियों का मानना है कि ग्रहण का प्रभाव अलग-अलग राशियों पर अलग तरह से पड़ता है। हालांकि, यह पूरी तरह अशुभ नहीं होता। कई बार ग्रहण आध्यात्मिक उन्नति का समय भी लाता है। विज्ञान इसे सिर्फ छाया और प्रकाश का खेल मानता है, जबकि ज्योतिष इसे ग्रहों की चाल और मानव जीवन पर उनके प्रभाव से जोड़कर देखता है।

साल 2026 में सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2026)

साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन अमावस्या के दिन लगेगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में रहने वालों के लिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में सामान्य जीवन में कोई विशेष रोक-टोक की आवश्यकता नहीं है।

साल 2026 में चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse 2026)

सूर्य ग्रहण के ठीक 15 दिन बाद, 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगने वाला है। यह ग्रहण खास इसलिए है क्योंकि इसी दिन होलिका दहन का पर्व मनाया जाएगा। चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसका सूतक काल मान्य होगा और पूजा या उत्सव के समय इसका प्रभाव पड़ सकता है।

ग्रहण के समय क्या करें? (What to do during an Eclipse)

ग्रहण के समय इष्ट देव का ध्यान और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। इस दौरान ध्यान, साधना और सकारात्मक कर्म करने से लाभ होता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना और दान करना भी परंपरा का हिस्सा है।

भोजन और सुरक्षा का ध्यान (Food and Safety Care)

ग्रहण के समय भोजन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पके हुए भोजन में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए ताकि भोजन दूषित न हो। इस तरह ग्रहण के समय सतर्क रहकर नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सकता है और धार्मिक मान्यताओं का पालन भी किया जा सकता है।

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ग्रहण क्या है और इसे ज्योतिष में क्यों महत्व दिया जाता है?

ग्रहण सूर्य या चंद्रमा पर लगने वाली छाया की खगोलीय घटना है। ज्योतिष में इसे ब्रह्मांड की ऊर्जा में बदलाव और मनुष्य जीवन पर प्रभाव डालने वाला माना जाता है।

सूतक काल क्या होता है और कब लगता है?

सूतक काल ग्रहण से पहले शुरू होने वाला समय होता है। सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लगता है। इस दौरान शुभ कार्य टालने की परंपरा होती है।

साल 2026 में सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?

नहीं, 17 फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में इसका सूतक काल लागू नहीं होगा।

चंद्र ग्रहण का प्रभाव कैसे अलग होता है?

चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा और इसका सूतक काल मान्य होगा। यह मानसिक और भावनात्मक प्रभाव डाल सकता है, इसलिए इस दौरान पूजा और उत्सवों में सावधानी बरतनी चाहिए।