CBSE on Screen Marking: अब डिजिटल सिस्टम चेक होगी कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाएं, CBSE का बड़ा फैसला, जानिए क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग?

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CBSE on Screen Marking: अब डिजिटल सिस्टम चेक होगी कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाएं, CBSE का बड़ा फैसला, जानिए क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग?

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  • Publish Date - February 12, 2026 / 12:24 PM IST,
    Updated On - February 12, 2026 / 12:24 PM IST

CBSE on Screen Marking | Photo Credit: IBC24

HIGHLIGHTS
  • कक्षा 12वीं की कॉपियां अब डिजिटली चेक होंगी
  • 13 फरवरी को प्रिंसिपल्स के लिए लाइव वेबकास्ट रखा गया है
  • OSM से मूल्यांकन तेज़, पारदर्शी और त्रुटि-रहित होगा

नई दिल्ली: CBSE on Screen Marking स्कूल हो या कॉलेज सभी की उत्तर पुस्तिकाएं अक्सर पेन और पेंसिल से मैन्युअल तरीके से चेक होती है, लेकिन CBSE ने अब बड़ा फैसला लिया है। CBSE ने क्लास 12 की कॉपी फिर ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) शुरू करने का निर्णय लिया है। यानी अब सीबीएसई बोर्ड 12वीं कक्षा के छात्रों की कापियां डिजिटली चेक होंगी।

CBSE ने जारी की नोटिस

CBSE Board Exam New Rules इस संबंध में CBSE ने एक नोटिस भी जारी किया है। जिसमें बताया ​है कि बोर्ड एग्जाम 2026 कराने के तरीकों पर एक लाइव वेबकास्ट होगा। इसमें बोर्ड से जुड़े सभी स्कूलों के प्रिंसिपल को शामिल होने के लिए बुलाया गया है। इस सेशन का मकसद तय प्रोग्राम के मुताबिक एग्जाम कराने और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के लिए गाइडलाइंस समझाना है।

क्या होती है ऑन-स्क्रीन मार्किंग?

OSM एक डिजिटल सिस्टम है जिसमें स्कैन की गई आंसर शीट को टीचर कंप्यूटर पर इवैल्यूएट करते हैं, और मार्क्स सॉफ्टवेयर से ऑटोमैटिकली कैलकुलेट हो जाते हैं। ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से जुड़ी जरूर गाइडलाइंस बताने के लिए CBSE ने 13, फरवरी को अपने बोर्ड से जुड़े सभी स्कूलों के प्रिंसिपल के लिए लाइव वेबकास्ट रखा है।

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ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) क्या है?

यह एक डिजिटल सिस्टम है जिसमें छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन कर कंप्यूटर पर भेजी जाती हैं और शिक्षक वहीं पर उनका मूल्यांकन करते हैं।

CBSE ने OSM कब से लागू किया है?

CBSE ने क्लास 12वीं की कॉपियों के लिए 2026 बोर्ड परीक्षा से OSM लागू करने का निर्णय लिया है।

OSM से छात्रों को क्या फायदा होगा?

इससे मूल्यांकन तेज़, पारदर्शी और त्रुटि-रहित होगा। साथ ही कॉपियों के गुम होने या गलत गणना की संभावना कम होगी।